धर्म संवाद / डेस्क : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसी महीने पड़ने वाले मंगलवार को मां गौरी की पूजा करने की भी परंपरा है। सावन के मंगलवार को की जाने वाली इस पूजा को मंगला गौरी पूजा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां गौरी सुखी वैवाहिक जीवन, सौभाग्य और दांपत्य सुख की देवी मानी जाती हैं।
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मान्यता है कि मंगला गौरी की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से विवाह से जुड़ी परेशानियों को दूर करने, वैवाहिक जीवन में प्रेम और सुख-शांति बढ़ाने तथा अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं में मंगल दोष को विवाह में देरी और वैवाहिक परेशानियों से जोड़ा जाता है। ऐसे में मंगला गौरी की पूजा को मंगल संबंधी बाधाओं के लिए भी शुभ माना जाता है।
विवाह में देरी हो रही है तो ऐसे करें मंगला गौरी पूजा
जिन कन्याओं के विवाह में बार-बार अड़चन आ रही है या लंबे समय से विवाह नहीं हो पा रहा है, वे सावन के मंगलवार को मां गौरी की पूजा कर सकती हैं।
पूजा के लिए सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और मां गौरी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने पूजा की तैयारी करें। इसके बाद मां के सामने घी का चौमुखी दीपक जलाएं। इसके बाद मां गौरी को 16 फूल या 16 प्रकार के फूल अर्पित करें। इनमें लाल फूल जरूर शामिल करें। मां को लाल चुनरी और लौंग भी अर्पित की जा सकती है।
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करें:
“ॐ ह्रीं गौर्ये नमः”
मंत्र जाप पूरा होने के बाद मां गौरी से अच्छे जीवनसाथी और शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें। यह उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।
पति-पत्नी के बीच विवाद हो तो करें यह उपाय
अगर पति-पत्नी के बीच बार-बार विवाद होता है, आपसी प्रेम कम हो गया है या दांपत्य जीवन में तनाव बना रहता है, तो सावन के मंगलवार की शाम मां गौरी की पूजा करने की मान्यता है। पूजा के दौरान मां गौरी के सामने घी के तीन दीपक जलाएं। इसके बाद मां के चरणों में सिंदूर, इत्र और 16 इलायची अर्पित करें।
इसके बाद निम्न मंत्र का 11 माला जाप करने की परंपरा बताई जाती है:
“ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”
पूजा समाप्त होने के बाद इलायची को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की धार्मिक मान्यता है।
रिश्ता टूटने की स्थिति में क्या करें?
अगर पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ गया है कि रिश्ता टूटने की स्थिति में पहुंच गया है, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार मध्य रात्रि में मां गौरी और भगवान शिव की संयुक्त पूजा की जा सकती है।
पूजा में भगवान शिव और मां गौरी को वस्त्र अर्पित करें। मां गौरी को सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, आभूषण, मेहंदी, काजल, शीशा और आलता अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद “ॐ गौरीशंकराय नमः” मंत्र का 11 माला जाप करें। जाप के बाद भगवान शिव और मां गौरी से वैवाहिक जीवन में सुख, शांति, प्रेम और आपसी समझ बनाए रखने की प्रार्थना करें।
मंगला गौरी पूजा का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां गौरी को सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक माना जाता है। सावन के मंगलवार को उनकी पूजा करने से वैवाहिक जीवन से जुड़ी बाधाओं को दूर करने और पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ाने की कामना की जाती है। कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी और शीघ्र विवाह की कामना से मां गौरी की पूजा करती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह पूजा करती हैं।
पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा में मन और विचारों की शुद्धता रखें।
- मां गौरी को लाल रंग की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- पूजा के दौरान श्रद्धा और संयम बनाए रखें।
- मंत्रों का जाप सही उच्चारण के साथ करने का प्रयास करें।
- किसी भी उपाय को अंधविश्वास के रूप में न लें; ये धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
Disclaimer
यह लेख धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसमें बताए गए उपायों के परिणामों की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है। इन्हें श्रद्धा और परंपरा के अनुसार ही देखें।
