देवताओं के गुरु बृहस्पति का मंदिर कहां-कहां है? जानें पूजा के बड़े लाभ और धार्मिक महत्व

By Tami

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Brihaspati Devta Ka Mandir:

धर्म संवाद / डेस्क : वैदिक ज्योतिष में नवग्रहों के गुरु माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति को सुख, सौभाग्य, ज्ञान, धन, यश और धर्म का कारक ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत और शुभ स्थिति में होते हैं, उसके जीवन में सफलता, सम्मान और खुशहाली बनी रहती है। वहीं, कमजोर बृहस्पति व्यक्ति के जीवन में कई तरह की परेशानियां और बाधाएं लेकर आते हैं।

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ऐसे में सवाल उठता है कि देवताओं के गुरु बृहस्पति का प्रसिद्ध मंदिर कहां स्थित है और उनके दर्शन-पूजन से क्या लाभ मिलता है? आइए जानते हैं।

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बनारस का प्राचीन बृहस्पति मंदिर

भगवान शिव की नगरी काशी में देवगुरु बृहस्पति का एक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। यह मंदिर गंगा नदी के किनारे दशाश्वमेध घाट रोड पर स्थित है और काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के बेहद करीब माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने काशी नगरी की स्थापना की थी, तब उन्होंने देवगुरु बृहस्पति को यहां विशेष स्थान प्रदान किया था। इस मंदिर में बृहस्पति देव शिवलिंग स्वरूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव ने यहां उनकी स्थापना की थी। प्रत्येक गुरुवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचती है।

जयपुर का प्रसिद्ध बृहस्पति धाम

राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित बृहस्पति धाम भी भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका निर्माण महज 45 दिनों में पूरा किया गया था।

किंवदंती है कि मंदिर के पुजारी को सपने में भगवान बृहस्पति के दर्शन हुए थे और उन्होंने यहां अपना धाम बनाने का आदेश दिया था। इसके बाद वर्ष 2009 में इस मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर में भगवान बृहस्पति की स्वर्णिम आभा वाली विशाल प्रतिमा स्थापित है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु शिक्षा, विवाह, करियर और सुख-समृद्धि की कामना लेकर दर्शन करने पहुंचते हैं।

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नैनीताल का बृहस्पति मंदिर

देवभूमि उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक में स्थित बृहस्पति मंदिर भी बेहद पवित्र माना जाता है। यह मंदिर ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों के बीच स्थित है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह स्थान देवगुरु बृहस्पति की तपस्थली है। कहा जाता है कि जब भी देवताओं पर कोई संकट आता था, तब भगवान बृहस्पति इसी स्थान पर बैठकर उसका समाधान खोजते थे। यह भी मान्यता है कि इसी स्थान पर कठिन तपस्या करके बृहस्पति देव ने भगवान शिव को प्रसन्न किया था, जिसके बाद उन्हें देवताओं के गुरु का पद प्राप्त हुआ।

बृहस्पति देव की पूजा करने के लाभ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति की पूजा करने से व्यक्ति को कई शुभ फल प्राप्त होते हैं।

  • ज्ञान, विवेक और बुद्धि में वृद्धि होती है।
  • विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
  • करियर और कारोबार में सफलता मिलती है।
  • धन, यश और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है।
  • गुरु ग्रह मजबूत होने से भाग्य का साथ मिलता है।
  • धर्म और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ती है।
  • जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .