धर्म संवाद / डेस्क : श्रावण (सावन) का पावन महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस पूरे माह में शिव भक्त व्रत, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कर भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन में सच्चे मन से भगवान शिव की उपासना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
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भगवान शिव को भोलेनाथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे केवल सच्चे भाव और समर्पण से ही प्रसन्न हो जाते हैं। पौराणिक ग्रंथों में ऐसे कई भक्तों का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने अपनी निष्ठा, तपस्या और त्याग से भगवान शिव का हृदय जीत लिया। आइए जानते हैं शिव के 8 महान भक्तों के बारे में।
1. भक्त कन्नप्पा – जिन्होंने अपनी आंखें भगवान शिव को अर्पित कर दीं

दक्षिण भारत के महान शिव भक्त कन्नप्पा नयनार की भक्ति का उदाहरण आज भी दिया जाता है। कथा के अनुसार जब उन्होंने देखा कि शिवलिंग की आंख से रक्त बह रहा है, तो बिना किसी संकोच के अपनी एक आंख निकालकर शिवलिंग पर अर्पित कर दी। जब दूसरी आंख से भी रक्त बहने लगा, तो उन्होंने दूसरी आंख भी अर्पित करने का संकल्प लिया। उनकी निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और उन्हें दृष्टि लौटाकर मोक्ष का आशीर्वाद दिया।
2. लंकापति रावण – शिव तांडव स्तोत्र के रचयिता

रावण को भले ही उसके अहंकार के कारण याद किया जाता हो, लेकिन वह भगवान शिव का अत्यंत विद्वान और तपस्वी भक्त था। कठोर तपस्या के दौरान उसने अपने दसों सिर एक-एक कर भगवान शिव को अर्पित किए। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उसे चंद्रहास तलवार और अनेक दिव्य शक्तियों का वरदान दिया। रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र आज भी शिव उपासना का महत्वपूर्ण स्तोत्र माना जाता है।
3. महर्षि मार्कंडेय – जिनकी भक्ति ने मृत्यु को भी रोक दिया

महर्षि मार्कंडेय की आयु केवल 16 वर्ष निर्धारित थी। जब यमराज उनके प्राण लेने पहुंचे, तब उन्होंने शिवलिंग को गले लगाकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप शुरू कर दिया। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और यमराज को रोकते हुए मार्कंडेय को दीर्घायु और चिरंजीवी होने का वरदान दिया।
4. बाणासुर – सहस्त्र भुजाओं वाला शिव भक्त

दैत्यराज बलि के पुत्र बाणासुर भगवान शिव के परम भक्त माने जाते हैं। कहा जाता है कि उन्होंने अपनी हजार भुजाओं से तांडव के समय अनेक वाद्ययंत्र बजाकर भगवान शिव को प्रसन्न किया। महादेव ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसके राज्य की रक्षा का वचन दिया।
5. नंदी – भगवान शिव के सबसे प्रिय गण

नंदी केवल भगवान शिव के वाहन ही नहीं, बल्कि उनके सबसे प्रिय भक्त और गणों के अधिपति भी हैं। ऋषि शिलाद के पुत्र नंदी ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। महादेव ने उन्हें अमरत्व प्रदान किया और अपने द्वारपाल तथा वाहन के रूप में स्वीकार किया।
6. भगवान श्रीराम – जिन्होंने स्थापित किया रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भी भगवान शिव के अनन्य भक्त माने जाते हैं। लंका विजय से पहले उन्होंने समुद्र तट पर बालू से शिवलिंग बनाकर पूजा की। यही स्थान आज रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है। शिव पुराण के अनुसार भगवान राम और भगवान शिव एक-दूसरे के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं।
7. कुबेर देव – शिव कृपा से बने धन के देवता

धन के देवता कुबेर ने भी कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिव की कृपा से उन्हें समस्त धन-संपदा का स्वामी बनाया गया। साथ ही उन्हें उत्तर दिशा का दिक्पाल और भगवान शिव का परम मित्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
8. उपमन्यु – बाल भक्ति का अद्भुत उदाहरण

शिव पुराण में वर्णित उपमन्यु की कथा अत्यंत प्रेरणादायक है। बालक उपमन्यु ने दूध पाने की इच्छा से भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी निष्ठा और समर्पण से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें दिव्य ज्ञान, समृद्धि और क्षीरसागर के समान ऐश्वर्य का वरदान दिया।
भगवान शिव क्यों होते हैं जल्दी प्रसन्न?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव केवल सच्चे भाव, श्रद्धा और समर्पण से प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें महंगे आभूषण या भव्य पूजा की आवश्यकता नहीं होती। एक लोटा जल, बेलपत्र, धतूरा और सच्ची भक्ति भी भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए पर्याप्त मानी जाती है।
सावन में शिव कृपा पाने के आसान उपाय
- प्रतिदिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- सोमवार का व्रत रखें।
- जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दान करें।
- शिव चालीसा, रुद्राष्टकम या शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
FAQ
Q1. भगवान शिव के सबसे बड़े भक्त कौन माने जाते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कन्नप्पा, नंदी, महर्षि मार्कंडेय, रावण, भगवान श्रीराम, उपमन्यु, कुबेर और बाणासुर भगवान शिव के प्रमुख भक्त माने जाते हैं।
Q2. सावन में शिव पूजा का क्या महत्व है?
मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की पूजा, व्रत और जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
Q3. भगवान शिव को सबसे प्रिय क्या है?
शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र, गंगाजल, धतूरा, भस्म, रुद्राक्ष और सच्ची भक्ति अत्यंत प्रिय है।






