क्या भगवान के नाम का Tattoo बनवाना सही है? प्रेमानंद महाराज ने बताया धार्मिक दृष्टि से क्या है सही तरीका

By Tami

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is it right to get a tattoo of a deity

धर्म संवाद / डेस्क : आज के समय में टैटू बनवाने का चलन काफी बढ़ गया है। युवा ही नहीं, बल्कि अलग-अलग उम्र के लोग भी अपने शरीर पर नाम, मंत्र, धार्मिक प्रतीक और देवी-देवताओं की आकृतियां बनवाते हैं। कई लोग इसे आस्था और भक्ति से जोड़कर देखते हैं।

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लेकिन क्या शरीर पर भगवान का नाम, मंत्र या धार्मिक प्रतीक Tattoo के रूप में बनवाना उचित है? इस विषय पर वृंदावन स्थित श्री हित राधा केलि कुंज आश्रम के संत प्रेमानंद महाराज की एक सलाह सोशल मीडिया पर चर्चा में है। महाराज ने एक भक्त के हाथ पर बने धार्मिक Tattoo को देखकर उसे इस संबंध में सावधानी बरतने की सलाह दी।

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भक्त के हाथ पर बना था महादेव का Tattoo

सोशल मीडिया पर वायरल बताए जा रहे एक वीडियो के अनुसार, एक व्यक्ति अपने परिवार के साथ प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचा था। इस दौरान महाराज की नजर उसके बाएं हाथ पर पड़ी। उस व्यक्ति के हाथ पर त्रिशूल के साथ ‘महादेव’ और अंग्रेजी में ‘Blessings’ लिखा हुआ था। इसे देखकर महाराज ने उसे भगवान के नाम को शरीर, विशेषकर हाथ पर Tattoo के रूप में बनवाने से बचने की सलाह दी।

हाथ पर भगवान का नाम लिखवाने को लेकर क्या कहा?

प्रेमानंद महाराज की बताई गई सलाह का मुख्य आधार पवित्र नाम के प्रति सम्मान है। उनके अनुसार, हाथों का इस्तेमाल रोजमर्रा के कई तरह के कामों में होता है। खासकर बाएं हाथ का इस्तेमाल व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े कार्यों में भी किया जाता है।

ऐसे में उनका कहना था कि भगवान के पवित्र नाम या धार्मिक प्रतीक का ऐसी जगह होना, जहां वह बार-बार अशुद्ध परिस्थितियों के संपर्क में आ सकता है, उचित नहीं माना जाना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने भक्त को भविष्य में इस तरह का Tattoo बनवाने से बचने की सलाह दी।

ध्यान दें: यह एक धार्मिक संत द्वारा दी गई आध्यात्मिक सलाह है। अलग-अलग जैन, हिंदू और अन्य धार्मिक परंपराओं में Tattoo और धार्मिक प्रतीकों को लेकर मान्यताएं अलग हो सकती हैं।

पहले से भगवान के नाम का Tattoo है तो क्या करें?

वीडियो में बताई गई सलाह के अनुसार, जिन लोगों ने पहले ही हाथ पर भगवान का नाम या धार्मिक प्रतीक Tattoo के रूप में बनवा लिया है, वे उसे लेकर घबराने के बजाय उसमें बदलाव कराने पर विचार कर सकते हैं।

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प्रेमानंद महाराज ने कथित तौर पर संबंधित व्यक्ति को Tattoo को Modify कराने की सलाह दी। उदाहरण के तौर पर धार्मिक नाम या प्रतीक की जगह कोई सामान्य फूल अथवा अन्य डिजाइन बनवाने की बात कही गई। इस सलाह का उद्देश्य भगवान के नाम या धार्मिक प्रतीक के अनादर की आशंका से बचना बताया गया।

भगवान को Tattoo नहीं, मन में बसाने की बात

प्रेमानंद महाराज की इस सलाह का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि भगवान की भक्ति केवल शरीर पर धार्मिक चिह्न बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भगवान के नाम का वास्तविक महत्व उनके स्मरण, जप और आचरण में है। यानी शरीर पर नाम लिखवाने के बजाय व्यक्ति अपने मन और हृदय में भगवान का स्मरण करे और उनके बताए मूल्यों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करे।

क्या भगवान के नाम का Tattoo पाप है?

इस सवाल का कोई एक सार्वभौमिक धार्मिक उत्तर नहीं है। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और संतों की इस विषय पर अलग-अलग राय हो सकती है। प्रेमानंद महाराज की बताई गई सीख के संदर्भ में इसे भगवान के नाम और धार्मिक प्रतीकों के प्रति सम्मान बनाए रखने की सलाह के तौर पर समझा जा सकता है। इसे सभी लोगों पर लागू होने वाला कोई सार्वभौमिक धार्मिक नियम मानना उचित नहीं होगा।

धार्मिक Tattoo बनवाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

अगर कोई व्यक्ति भगवान का नाम, मंत्र या धार्मिक प्रतीक शरीर पर बनवाने के बारे में सोच रहा है, तो इन बातों पर विचार कर सकता है:

  • धार्मिक प्रतीक का अर्थ और महत्व अच्छी तरह समझें।
  • उसे शरीर के किस हिस्से पर बनवाया जा रहा है, इस पर विचार करें।
  • अपनी धार्मिक परंपरा और मान्यताओं को ध्यान में रखें।
  • किसी संत या विद्वान की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।
  • केवल फैशन के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करने से पहले उनके प्रति सम्मान का ध्यान रखें।

भगवान का नाम कहां और कैसे स्मरण करना चाहिए?

भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में भगवान के नाम के जप और स्मरण को विशेष महत्व दिया गया है। इसके लिए किसी व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में पूजा, ध्यान, मंत्र-जप और अच्छे कर्मों को स्थान देने की प्रेरणा मिलती है। इस दृष्टि से प्रेमानंद महाराज की सलाह का सार यही है कि भगवान का नाम शरीर पर दिखाने से ज्यादा महत्वपूर्ण उसे मन में धारण करना है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .