बसंत पंचमी और होली का कनेक्शन: क्यों बसंत पंचमी से शुरू होती है होली की तैयारी?

By Tami

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Basant Panchami 2026, the beginning of Holi

धर्म संवाद / डेस्क : मकर संक्रांति के बाद देशभर में बसंत पंचमी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की आराधना के लिए समर्पित किया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बसंत पंचमी केवल सरस्वती पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसी दिन से होली के उत्सव की भी विधिवत शुरुआत मानी जाती है?

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बसंत पंचमी: ऋतुओं के राजा का स्वागत

बसंत पंचमी के साथ ही बसंत ऋतु का आगमन होता है। यह दिन इस बात का संकेत देता है कि शीत ऋतु अब विदा लेने वाली है और प्रकृति नए रंगों के साथ खिलने वाली है। बसंत ऋतु को ‘ऋतुओं का राजा’ कहा जाता है, क्योंकि इस समय प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में दिखाई देती है। पेड़ों पर नए फूल, सरसों के खेतों में लहलहाते पीले फूल और हरियाली चारों ओर खुशियों का संदेश देती है।

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इसी वजह से बसंत पंचमी को नई ऊर्जा, नई शुरुआत और प्रकृति के उत्सव का प्रतीक माना जाता है। यह दिन प्रकृति पूजन और सकारात्मकता से भी जुड़ा हुआ है।

बसंत पंचमी और होली का गहरा धार्मिक संबंध

बसंत पंचमी और होली दोनों ही पर्व बसंत ऋतु से जुड़े हुए हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, बसंत ऋतु का आगमन ही होली के उत्सव का संकेत माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन से ही फाग गीत गाने की परंपरा शुरू हो जाती है।

खासकर ब्रज क्षेत्र में बसंत पंचमी से ही होली का उत्सव आरंभ हो जाता है, जो लगभग 40 दिनों तक चलता है। इस दौरान प्रतिदिन मंदिरों में भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है और भक्तिमय वातावरण में रंगों का उत्सव मनाया जाता है।

प्रकृति के रंग और होली की तैयारी

बसंत ऋतु के दौरान प्रकृति अपने बारह रंगों को प्रदर्शित करने लगती है। यही कारण है कि इस पूरे समय को रंगों, उल्लास और उमंग का प्रतीक माना गया है। एक महीने तक चलने वाली यह अवधि होली की तैयारियों के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। इसलिए होली को केवल रंगों का नहीं, बल्कि प्रकृति के उत्सव का पर्व भी कहा जाता है।

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पौराणिक कथा: प्रेम और रंगों की शुरुआत

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि में प्रेम और रंग भरने के लिए कामदेव और रति ने भगवान शिव की तपस्या को भंग किया था। इसी घटना के बाद से बसंत पंचमी से लेकर होली तक का समय प्रेम, उत्साह और उल्लास का काल माना जाने लगा।
जहां बसंत पंचमी पर शांति, ज्ञान और साधना का भाव होता है, वहीं जैसे-जैसे फाल्गुन माह नजदीक आता है, वही शांति आनंद, उत्सव और रंगों में बदल जाती है।

बसंत पंचमी से होली तक: उत्सवों की श्रृंखला

इस प्रकार बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि होली जैसे महापर्व की भूमिका भी है। यही वजह है कि हिंदू परंपरा में बसंत पंचमी को होली के उत्सव की पहली सीढ़ी माना जाता है।

FAQs

Q1. क्या बसंत पंचमी से होली की शुरुआत होती है?
हाँ, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी से ही होली के उत्सव की शुरुआत मानी जाती है, खासकर ब्रज क्षेत्र में।

Q2. बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व क्या है?
बसंत पंचमी को विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा का पर्व माना जाता है और यह नई ऊर्जा व नई शुरुआत का प्रतीक है।

Q3. बसंत पंचमी और होली का क्या संबंध है?
दोनों ही पर्व बसंत ऋतु से जुड़े हैं। बसंत पंचमी से प्रकृति में रंग भरने की शुरुआत होती है, जो फाल्गुन में होली के रूप में चरम पर पहुंचती है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .