धर्म संवाद / डेस्क : आज के दौर में अक्सर सास-बहू के रिश्तों में विवाद और दूरियों की खबरें सामने आती रहती हैं। कभी बहू द्वारा सास-ससुर को घर से निकालने की घटनाएं सुर्खियां बनती हैं, तो कभी सास और बहू के बीच झगड़े की कहानियां चर्चा में रहती हैं। लेकिन इसी कलियुग में हरियाणा की एक बहू ने सेवा, समर्पण और प्रेम की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है।
हरियाणा की बहू ने निभाया अपना फर्ज
हरियाणा के पलवल जिले के हताना गांव की रहने वाली हरियाणवी लोकगायिका काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चन्द्री देवी की वर्षों पुरानी इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें सिर पर बैठाकर 84 कोस ब्रज परिक्रमा करा रही हैं। यह परिक्रमा लगभग 252 किलोमीटर लंबी मानी जाती है और इसे हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है।
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सास की अधूरी इच्छा को बनाया अपना संकल्प
चन्द्री देवी उम्र के अंतिम पड़ाव में हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं। इसके बावजूद उनके मन में वर्षों से ब्रज की 84 कोस परिक्रमा करने की गहरी इच्छा थी। जब स्वास्थ्य ने उनका साथ नहीं दिया, तब उनकी बहू काजल चौधरी ने उनकी इस मनोकामना को अपना संकल्प बना लिया।
काजल चौधरी अपनी सास को लोहे की परात (तसले) में बैठाकर सिर पर उठाए गांव-गांव, तीर्थ-तीर्थ और धाम-धाम तक ले जा रही हैं। भीषण गर्मी, उमस और लंबी दूरी भी उनके हौसले को कमजोर नहीं कर पा रही है।
लोगों के लिए बनी प्रेरणा
परिक्रमा मार्ग पर जो भी इस अनोखे दृश्य को देख रहा है, वह सास-बहू के इस अटूट रिश्ते की सराहना कर रहा है। सोशल मीडिया पर भी यह कहानी तेजी से वायरल हो रही है और लोग काजल चौधरी के समर्पण और सेवा भाव की प्रशंसा कर रहे हैं।
“मेरी सास मेरे लिए मां के समान हैं”
काजल चौधरी का कहना है कि उनकी सास ने हमेशा उन्हें बेटी की तरह प्यार और सम्मान दिया है। इसलिए उनकी कोई भी इच्छा अधूरी रह जाए, यह उन्हें मंजूर नहीं था। उन्होंने कहा, “मेरी सास मेरे लिए मां के समान हैं। उनकी इच्छा पूरी करना मेरा कर्तव्य है। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से मैं यह परिक्रमा पूरी कर रही हूं।”
चन्द्री देवी के चेहरे पर दिख रही खुशी
तसले में बैठी 90 वर्षीय चन्द्री देवी के चेहरे पर संतोष, श्रद्धा और खुशी साफ दिखाई देती है। उनकी आंखों में उस सपने के साकार होने की चमक है, जिसे उन्होंने उम्र और स्वास्थ्य की मजबूरियों के कारण शायद अधूरा मान लिया था।
समाज को दे रही बड़ा संदेश
सास-बहू के रिश्ते की यह प्रेरणादायक कहानी समाज को यह संदेश दे रही है कि प्रेम, सम्मान और समर्पण से हर असंभव कार्य संभव बनाया जा सकता है। जहां रिश्तों में दूरियां बढ़ने की बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं, वहीं हरियाणा की इस बहू ने साबित कर दिया कि परिवार में प्रेम और सेवा की भावना आज भी जीवित है।
यह कहानी सिर्फ एक परिक्रमा की नहीं, बल्कि संस्कार, समर्पण और रिश्तों की सच्ची ताकत की मिसाल है।
