अयोध्या में राम मंदिर घूमने के बाद, इन धार्मिक स्थलों के भी दर्शन जरूर करें

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धर्म संवाद / डेस्क : अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है। अब आप भी श्री राम के दर्शन के लिए जा सकते हैं। यह स्थान राम की जन्मस्थली होने के कारण इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। लेकिन आपको बता दें अयोध्या में केवल राम मंदिर ही नहीं बल्कि और भी खूबसूरत जगहें हैं जिन्हें आपको जरूर देखना चाहिए। इन जगहों का संबंध श्रीराम से भी है। अगर आप भी खूबसूरत अयोध्या देखने का प्लान बना रहे हैं तो चलिए आपको उन जगहों के बारे में बताते हैं जिन्हें आपको अपनी अयोध्या यात्रा की लिस्ट में जरूर शामिल करना चाहिए।

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त्रेता के ठाकुर

त्रेता के ठाकुर मंदिर में भगवान श्री राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान, भरत, सुग्रीव समेत कई मूर्तियां शामिल हैं। यह मंदिर अयोध्या के नया घाट के पास स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इन मूर्तियों को काले बलुआ पत्थर से बनाया गया है। इस मंदिर कानिर्माण 300 साल पहले राजा कुल्लू द्वारा करवाया गया था। अहिल्याबाई होल्कर जो 1700 के दशक में मराठा की रानी थी उन्होंने इस मंदिर की मरम्मत करवाकर नया रूप दिया था।आपको बता दे  यह साल में एक बार एकादशी के रूप में चिह्नित दिन पर जनता के लिए खुला रहता है।

हनुमानगढ़ी

हनुमान गढ़ी अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। हनुमान गढ़ी में हनुमान को समर्पित एक मंदिर है । यह मंदिर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है । मंदिर तक पहुंचने के लिए यात्रियों को 76 सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है। मंदिर में स्थित हनुमान जी की मूर्ति भक्तों का स्वागत करती है। पहाड़ी की चोटी से आसपास की पहाड़ियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है। हनुमान गढ़ी के बारे में यह भी मान्यता है कि जो भी भक्त यहां आकर सच्चे मन से मनोकामना करते हैं, भगवान उनकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अयोध्या में सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में बजरंगबली के दर्शन करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए, फिर उसके बाद अन्य मंदिरों का दर्शन करना चाहिए। कहां जाता है कि  हनुमानजी की कृपा के बिना किसी को रामजी का आशीर्वाद नहीं मिलता है। भगवान राम के दर्शन करने से पहले उनके सबसे प्रिय भक्त हनुमानजी के दर्शन और उनकी आज्ञा लेना जरूरी माना जाता है। 

छोटी छावनी

वाल्मीकि भवन या मणिरामदास छावनी के रूप में भी जाना जाने वाला छोटी छावनी भवन, अयोध्या में एक शानदार संरचना है, जिसे पूरी तरह से सफेद संगमरमर से तैयार किया गया है। सुंदरता से भरपूर, यह जगह निश्चित रूप से देखने लायक है। छोटी छावनी की गुफाओं की संख्या 34 हैं, दक्षिण में 12 बौद्ध हैं, केंद्र में 17 हिंदू हैं और उत्तर में 5 जैन हैं, इसलिए यह एक महत्वपूर्ण और विस्तृत स्थापत्य प्रतिभा है।

तुलसी स्मारक भवन

इसकी स्थापना संत कवि गोस्वामी तुलसीदास की स्मृति में की गई थी। माना जाता है कि  इसी भव्य स्थान पर तुलसीदास जी ने रामचरित की रचना की थी। यह एक विशाल पुस्तकालय है जहां आपको साहित्य का भंडार देखने को मिलेगा। यहां आपको अयोध्या के साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म की जानकारी मिल जाएगी। यह स्मारक रामायण कला और शिल्प को प्रदर्शित करता है। अयोध्या में राजगांग क्रॉसिंग पर राष्ट्रीय राजमार्ग के पूर्वी छोर पर स्थित, स्मारक 1969 में बनाया गया था ।स्मारक में ‘अयोध्या अनुसंधान संस्थान’ नामक एक शोध केंद्र भी है। इसका उपयोग अयोध्या के बारे में साहित्यिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जानकारी के अध्ययन और महत्व को जोड़ने के लिए किया जाता है। केंद्र रामायण कला और शिल्प को भी प्रदर्शित करता है और इसमें रामकथा का रोजाना पाठ भी होता है।

बहु बेगम का मकबरा

बहू बेगम का मकबरा पूर्व ताजमहल के नाम से भी जाना जाता है। यह फैजाबाद के सबसे ऊंचे स्मारक में गिना जाता है। यह मकबरा अवध के प्रसिद्ध वास्तुकला का अनोखा प्रदर्शन है। नवाब शुजा-उद-दौला की पत्नी और रानी दुल्हन बेगम उन्मतुज़ोहरा बानो को समर्पित अद्वितीय मकबरा, फैजाबाद में सबसे ऊंचा स्मारक है और अपनी गैर-मुगल स्थापत्य प्रतिभा के लिए प्रसिद्ध है। अवधी वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण, बहू बेगम का मकबरा में तीन गुंबद हैं, जटिल रूप से डिजाइन किए गए आंतरिक भाग और अद्भुत तरीके से बनाई गई दीवारें और छत हैं। 1816 में निर्मित, रानी की याद में, जहां उन्हें मृत्यु के बाद दफनाया गया था, इस मंदिर की कुल लागत तीन लाख रुपये थी। मकबरे के ऊपर से पूरे शहर का खूबसूरत दृश्य भी देखा जा सकता है।

दंत धावन कुंड

हनुमानगढ़ी के पास ही दंतधावन कुंड मौजूद है। इस जगह को राम दतौन भी कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीराम इसी कुंड के पानी से अपने दांत साफ करते थे। अगर आप अयोध्या जा रहे हैं, तो इस कुंड को भी जरूर देखने जाएं।

राजा दशरथ महल

 

धार्मिक मान्यता है कि राजा दशरथ महल में भगवान राम का बचपन बीता था। इसी भवन में प्रभु राम अपने भाइयों संग खेला करते थे। इस पौराणिक महल का कालांतर में कई बार जीर्णोद्धार भी किया गया. महाराज दशरथ के महल को बड़ा स्थान या बड़ी जगह के नाम से भी जाना जाता है। वर्तमान समय में दशरथ महल अब एक पवित्र मंदिर के रूप में तब्दील हो चुका है। जहां भगवान राम माता सीता लक्ष्मण शत्रुघ्न और भरत की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इस पवित्र जगह पर वैष्णव परम्परा की प्रसिद्ध पीठ और विन्दुगादी की सर्वोच्च पीठ भी स्थित है। 

गुप्तार घाट

सरयू नदी के तट पर स्थित, जिसे घग्गर के नाम से भी जाना जाता है, गुप्तार घाट अयोध्या के पास फैजाबाद में एक प्रतिष्ठित स्थल है। पवित्र नदी की ओर जाने वाली सीढ़ियों के साथ, यह घाट कभी औपनिवेशिक कंपनी गार्डन का पड़ोसी था, जिसे अब गुप्त घाट वन के नाम से जाना जाता है। इस स्थान पर भगवान राम ने ध्यान किया था और नदी में ‘जल समाधि’ ली थी। जिसके बाद, उन्होंने ‘बैकुंठ’ प्राप्त किया और भगवान विष्णु के अवतार के रूप में स्वर्ग में उतरे।

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