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आंजनेय स्तोत्र: संकटों को दूर करने और हनुमान जी की कृपा पाने का चमत्कारी स्तोत्र

By Tami

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धर्म संवाद / डेस्क : सनातन धर्म में भगवान हनुमान को शक्ति, साहस, भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करता है, उसके जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं। भगवान हनुमान को प्रसन्न करने के लिए कई स्तोत्र और मंत्रों का उल्लेख मिलता है, जिनमें आंजनेय स्तोत्र का विशेष महत्व बताया गया है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित रूप से आंजनेय स्तोत्र का पाठ करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा, रोग और शत्रु बाधाओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास, साहस और सकारात्मकता का संचार होता है।

क्या है आंजनेय स्तोत्र?

‘आंजनेय’ भगवान हनुमान का एक नाम है, क्योंकि वे माता अंजना के पुत्र हैं। आंजनेय स्तोत्र भगवान हनुमान की महिमा, उनकी शक्ति और उनके दिव्य गुणों का वर्णन करने वाला एक पवित्र स्तोत्र है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्त को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति मिलती है।

आंजनेय स्तोत्र

रं रं रं रक्तवर्णं दिनकरवदनं तीक्ष्णदंष्ट्राकरालंरं रं रं रम्यतेजं गिरिचलनकरं कीर्तिपंचादि वक्त्रम् ।

रं रं रं राजयोगं सकलशुभनिधिं सप्तभेतालभेद्यंरं रं रं राक्षसांतं सकलदिशयशं रामदूतं नमामि ॥ 1 ॥

खं खं खं खड्गहस्तं विषज्वरहरणं वेदवेदांगदीपंखं खं खं खड्गरूपं त्रिभुवननिलयं देवतासुप्रकाशम् ।

खं खं खं कल्पवृक्षं मणिमयमकुटं माय मायास्वरूपंखं खं खं कालचक्रं सकलदिशयशं रामदूतं नमामि ॥ 2 ॥

इं इं इं इंद्रवंद्यं जलनिधिकलनं सौम्यसाम्राज्यलाभंइं इं इं सिद्धियोगं नतजनसदयं आर्यपूज्यार्चितांगम् ।

इं इं इं सिंहनादं अमृतकरतलं आदिअंत्यप्रकाशंइं इं इं चित्स्वरूपं सकलदिशयशं रामदूतं नमामि ॥ 3 ॥

सं सं सं साक्षिभूतं विकसितवदनं पिंगलाक्षं सुरक्षंसं सं सं सत्यगीतं सकलमुनिनुतं शास्त्रसंपत्करीयम् ।

सं सं सामवेदं निपुण सुललितं नित्यतत्त्वस्वरूपंसं सं सं सावधानं सकलदिशयशं रामदूतं नमामि ॥ 4 ॥

हं हं हं हंसरूपं स्फुटविकटमुखं सूक्ष्मसूक्ष्मावतारंहं हं हं अंतरात्मं रविशशिनयनं रम्यगंभीरभीमम् ।

हं हं हं अट्टहासं सुरवरनिलयं ऊर्ध्वरोमं करालंहं हं हं हंसहंसं सकलदिशयशं रामदूतं नमामि ॥ 5 ॥



॥ इति आञ्जनेयस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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