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अंबुबाची मेले का सबसे बड़ा रहस्य, आखिर क्यों लाल दिखता है ब्रह्मपुत्र का पानी?

By Tami

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Brahmaputra River Turns Red During Ambubachi Mela

धर्म संवाद / डेस्क : हर साल अंबुबाची मेले के दौरान असम के गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या मंदिर और ब्रह्मपुत्र नदी से जुड़ी एक अनोखी घटना लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। मान्यता है कि इन दिनों ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है। करोड़ों श्रद्धालु इसे मां कामाख्या के वार्षिक रजस्वला (मासिक धर्म) काल से जोड़कर देखते हैं, जबकि वैज्ञानिक इसके पीछे प्राकृतिक कारण बताते हैं।

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क्यों बंद होते हैं कामाख्या मंदिर के कपाट?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अंबुबाची मेले के दौरान मां कामाख्या अपने वार्षिक मासिक धर्म चक्र में होती हैं। इसी कारण मंदिर के गर्भगृह के कपाट तीन दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं और इस दौरान किसी भी श्रद्धालु को प्रवेश की अनुमति नहीं होती।

तीन दिन बाद जब मंदिर के कपाट खुलते हैं, तब भक्तों को प्रसाद स्वरूप ‘अम्बुबाची वस्त्र’ यानी लाल रंग का पवित्र कपड़ा दिया जाता है, जिसे बेहद शुभ माना जाता है।

क्या सच में लाल हो जाता है ब्रह्मपुत्र का पानी?

श्रद्धालुओं का मानना है कि मां कामाख्या के रजस्वला काल के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों लोग इस अद्भुत घटना को देखने और मां के दर्शन के लिए गुवाहाटी पहुंचते हैं।

विज्ञान क्या कहता है?

वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रह्मपुत्र नदी के पानी का लाल दिखाई देना किसी चमत्कार का परिणाम नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक और भौगोलिक प्रक्रिया है।

1. आयरन ऑक्साइड और सिंदूरिया चट्टानें

कामाख्या मंदिर की नीलांचल पहाड़ियों की मिट्टी और चट्टानों में आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide) और सिंदूरिया खनिज बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। यही तत्व पानी को लाल रंग देने में अहम भूमिका निभाते हैं।

2. मानसून और मिट्टी का कटाव

जून में असम में भारी बारिश होती है। बारिश का पानी पहाड़ियों की मिट्टी और खनिजों को बहाकर ब्रह्मपुत्र नदी में ले जाता है, जिससे नदी का पानी लाल या मटमैला लाल दिखाई देने लगता है।

3. लाल शैवाल (Red Algae)

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान पानी में विशेष प्रकार के लाल शैवाल की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे भी पानी का रंग बदल सकता है।

आस्था और विज्ञान का अनूठा संगम

अंबुबाची मेला केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि नारीत्व, सृजन और प्रकृति की उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। जहां विज्ञान इसे प्राकृतिक प्रक्रिया बताता है, वहीं सनातन परंपरा में इसे देवी शक्ति और प्रकृति के उत्सव के रूप में देखा जाता है। इसी अनूठे संगम के कारण अंबुबाची मेला और ब्रह्मपुत्र नदी का यह रहस्य दुनिया भर के श्रद्धालुओं, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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