धर्म संवाद / डेस्क : करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत करती हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं। लेकिन जब बात गर्भवती महिलाओं की आती है, तो व्रत के नियमों को लेकर विशेष सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है।
यह भी पढ़े : Karwa Chauth 2026: इन 6 लोगों को नहीं रखना चाहिए निर्जला व्रत
गर्भावस्था के दौरान मां और गर्भ में पल रहे शिशु, दोनों का स्वास्थ्य महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में कई महिलाओं के मन में सवाल उठता है कि क्या प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का व्रत रखा जा सकता है? क्या गर्भवती महिलाएं व्रत के दौरान पानी पी सकती हैं? क्या निर्जला व्रत रखने से बच्चे की सेहत पर असर पड़ सकता है? आइए जानते हैं गर्भावस्था में करवा चौथ का व्रत रखने से जुड़ी जरूरी बातें और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां।
क्या गर्भवती महिलाएं करवा चौथ पर पानी पी सकती हैं?
हां, गर्भवती महिलाओं को जरूरत के अनुसार पानी पीना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान शरीर में पर्याप्त पानी बनाए रखना जरूरी होता है। लंबे समय तक पानी नहीं पीने से डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी और पेशाब कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
गर्भावस्था में निर्जला व्रत रखने की सुरक्षा को लेकर अपने डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। गर्भवती महिलाओं को केवल धार्मिक परंपरा निभाने के लिए पानी और भोजन से पूरी तरह परहेज नहीं करना चाहिए। उनकी सेहत, गर्भावस्था की अवस्था और किसी भी मौजूदा स्वास्थ्य समस्या के अनुसार उचित सलाह अलग-अलग हो सकती है।
यदि आप करवा चौथ का व्रत रखना चाहती हैं, तो अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से पहले ही चर्चा करें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी और पौष्टिक भोजन लेते हुए अपनी आस्था के अनुरूप पूजा कर सकती हैं।
गर्भावस्था में निर्जला करवा चौथ व्रत रखना कितना सुरक्षित है?
गर्भावस्था के दौरान शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ, ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। लंबे समय तक भोजन और पानी से दूर रहने पर कुछ महिलाओं में डिहाइड्रेशन, कमजोरी या चक्कर आने का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेष रूप से इन परिस्थितियों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है:
- गर्भावस्था के दौरान बार-बार उल्टी या मतली होना।
- लो ब्लड प्रेशर या चक्कर आने की समस्या।
- गर्भावस्था में डायबिटीज होना।
- पहले से किडनी या अन्य कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या होना।
- डॉक्टर द्वारा विशेष आहार या नियमित अंतराल पर भोजन और तरल पदार्थ लेने की सलाह दिया जाना।
ऐसी स्थिति में निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना बेहद जरूरी है। यदि चिकित्सक व्रत न रखने या नियमित रूप से पानी और भोजन लेने की सलाह देते हैं, तो उसी का पालन करें।
करवा चौथ पर गर्भवती महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
1. पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें
गर्भावस्था में शरीर को पानी की जरूरत होती है। इसलिए अपनी प्यास और डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से पानी पीती रहें। जरूरत के अनुसार दूध या अन्य सुरक्षित पेय पदार्थ भी ले सकती हैं। नारियल पानी और अन्य पेय पदार्थ भी विकल्प हो सकते हैं, लेकिन किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या में इनका सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें।
2. सरगी में पौष्टिक आहार शामिल करें
करवा चौथ पर सरगी खाने की परंपरा है। गर्भवती महिलाएं सरगी में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल कर सकती हैं, जो ऊर्जा और पोषण प्रदान करें।
सरगी में इन चीजों को शामिल करना उपयोगी हो सकता है:
- दूध या दही, यदि इन्हें लेने में कोई परेशानी न हो।
- मौसमी फल।
- साबुत अनाज से बनी चीजें।
- मेवे, यदि किसी प्रकार की एलर्जी न हो।
- प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ।
- पर्याप्त पानी।
बहुत ज्यादा तली-भुनी, नमकीन या मसालेदार चीजें खाने से कुछ महिलाओं में एसिडिटी और मतली बढ़ सकती है। इसलिए अपनी सहनशीलता के अनुसार संतुलित भोजन चुनें।
3. कमजोरी या चक्कर आने पर तुरंत ध्यान दें
यदि व्रत के दौरान गर्भवती महिला को चक्कर, बहुत ज्यादा कमजोरी, कंपकंपी, बेहोशी जैसा महसूस होना या पेशाब कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में व्रत जारी रखने की जिद न करें। पानी और भोजन लेने के साथ जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लें। बेहोशी, भ्रम या गंभीर लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।
4. पूजा के दौरान आराम का ध्यान रखें
करवा चौथ की पूजा में लंबे समय तक जमीन पर बैठना या खड़े रहना कुछ गर्भवती महिलाओं के लिए असुविधाजनक हो सकता है। ऐसी स्थिति में कुर्सी पर बैठकर आराम से पूजा कर सकती हैं। पूजा के दौरान जरूरत पड़ने पर आराम करें और अधिक थकान वाले कामों से बचें। पूजा की विधि को अपनी शारीरिक सुविधा के अनुसार अपनाना उचित है।
5. डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं या खानपान में बदलाव न करें
यदि आप गर्भावस्था में किसी दवा का सेवन कर रही हैं या आपको विशेष आहार लेने की सलाह दी गई है, तो व्रत के कारण दवा छोड़ना या भोजन का समय बदलना उचित नहीं है। व्रत रखने से पहले डॉक्टर से पूछें कि आपकी स्थिति में उपवास सुरक्षित है या नहीं। स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों को धार्मिक परंपराओं से ऊपर प्राथमिकता देना जरूरी है।
क्या गर्भवती महिलाएं बिना निर्जला व्रत के करवा चौथ की पूजा कर सकती हैं?
गर्भवती महिलाएं अपनी सेहत और डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखते हुए करवा चौथ की पूजा में भाग ले सकती हैं। यदि निर्जला व्रत रखना सुरक्षित नहीं है, तो पानी और भोजन लेते हुए पूजा, व्रत कथा और प्रार्थना कर सकती हैं।
धार्मिक परंपराओं का पालन परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए अपनी आस्था के अनुरूप पूजा का तरीका चुनते समय स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। व्रत की भावना प्रेम, समर्पण और परिवार की खुशहाली की कामना से जुड़ी है; इसके लिए अपनी या गर्भस्थ शिशु की सेहत को जोखिम में डालना जरूरी नहीं है।
करवा चौथ 2026: गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी सलाह
करवा चौथ के दिन गर्भवती महिलाओं को अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार ही व्रत रखने का निर्णय लेना चाहिए। निर्जला उपवास से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह लें और पर्याप्त पानी तथा पोषण की जरूरत को नजरअंदाज न करें।
यदि डॉक्टर व्रत रखने से मना करते हैं, तो उनकी सलाह का पालन करें। पूजा में शामिल होने के लिए निर्जला उपवास करना अनिवार्य नहीं मानना चाहिए। स्वस्थ रहकर अपनी आस्था और परंपरा का पालन करना ही सबसे महत्वपूर्ण है।






