Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर करें ये 9 उपाय, मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जरूर करें ये काम

By Tami

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Sharad Purnima Upay

धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर चंद्रदेव की पूजा और मां लक्ष्मी की आराधना करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। यही वजह है कि इस दिन पूजा-पाठ, दीपदान और मंत्र जाप को विशेष महत्व दिया जाता है।

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शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। इसलिए कई लोग रात में जागरण करते हैं और माता की पूजा करके परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस अवसर पर खीर बनाकर मां लक्ष्मी को भोग लगाने और चांदनी में रखने की परंपरा भी प्रचलित है। इसके अलावा घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना, तुलसी की पूजा करना और जरूरतमंदों को दान देना जैसे धार्मिक कार्य भी किए जाते हैं।

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वर्ष 2026 में शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर, रविवार को मनाया जाएगा। यदि आप भी इस अवसर पर मां लक्ष्मी की आराधना करना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा पर किए जाने वाले 9 पारंपरिक उपायों के बारे में।

1. शरद पूर्णिमा पर विधि-विधान से करें मां लक्ष्मी की पूजा

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान करके घर के पूजा स्थल की सफाई करें। शाम को मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं और उन्हें फूल अर्पित करें।

इसके बाद माता के सामने हाथ जोड़कर परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना करें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार फल, मिठाई या अन्य सात्विक सामग्री का भोग लगा सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की आराधना करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

2. मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और उसका भोग लगाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। दूध और चावल से तैयार खीर को माता लक्ष्मी को अर्पित किया जाता है। कई परिवारों में खीर को रात में चांदनी के नीचे रखने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। आप चाहें तो खीर में इलायची और मेवे भी मिला सकते हैं।

खीर को चांदनी में रखने की परंपरा निभाते समय उसे साफ और ढके हुए बर्तन में रखें। दूध से बनी खीर को लंबे समय तक खुले में छोड़ने से बचें और खाद्य सुरक्षा का ध्यान रखें।

3. चंद्रदेव को अर्घ्य देकर करें प्रार्थना

शरद पूर्णिमा पर चंद्रदेव की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन चंद्रोदय के बाद चंद्रमा के दर्शन करके उन्हें जल अर्पित करने की परंपरा है। इसके लिए एक साफ पात्र में जल लेकर श्रद्धापूर्वक चंद्रदेव को अर्घ्य दें। इस दौरान मन को शांत रखते हुए परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-शांति की कामना करें।

धार्मिक मान्यताओं में चंद्रदेव की उपासना को मानसिक शांति और सकारात्मक भाव से जोड़ा जाता है। अर्घ्य देने का समय तय करने के लिए अपने क्षेत्र के चंद्रोदय समय की जानकारी अवश्य लें।

4. शरद पूर्णिमा पर जरूरतमंदों को करें दान

हिंदू धर्म में दान-पुण्य को महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य माना गया है। शरद पूर्णिमा पर अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, फल, कपड़े या दैनिक उपयोग की वस्तुएं दान कर सकते हैं। दान करते समय अपनी सामर्थ्य का ध्यान रखें। किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना या जरूरतमंद परिवार की सहायता करना भी सेवा का अच्छा तरीका है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दान-पुण्य से मन में संतोष और सेवा भाव विकसित होता है। इसलिए इस पर्व पर जरूरतमंदों की मदद करके भी पुण्य कार्य करने की परंपरा निभाई जा सकती है।

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5. घर के मुख्य द्वार पर जलाएं घी का दीपक

शरद पूर्णिमा की शाम घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक प्रकाश, शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक है। आप घर के प्रवेश द्वार या पूजा स्थल के पास घी का दीपक जला सकते हैं। दीपक जलाते समय मां लक्ष्मी का स्मरण करें और घर में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करें। ध्यान रखें कि दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें और उसे पर्दों, कागजों या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं के पास न जलाएं।

6. तुलसी के पौधे के पास जलाएं दीपक

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को पूजनीय माना जाता है। कई घरों में प्रतिदिन शाम को तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर भी श्रद्धालु तुलसी की पूजा करके परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं। इस दिन शाम को तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें। पौधे की देखभाल और पूजा के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी की पूजा घर में शांति और मंगल की कामना से जुड़ी है।

7. मां लक्ष्मी के मंत्र का करें जाप

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान मंत्र जाप करना भी शुभ माना जाता है। आप शांत मन से बैठकर माता के मंत्र का जाप कर सकते हैं।

मां लक्ष्मी का एक प्रचलित मंत्र है:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

इस मंत्र का अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार जाप करें। इसके बाद कुछ समय ध्यान और प्रार्थना में बिताएं। मंत्र जाप के दौरान मन को एकाग्र रखने और सकारात्मक भाव बनाए रखने का प्रयास करें। धार्मिक परंपरा में मंत्र जाप को भक्ति और आत्मचिंतन का माध्यम माना जाता है।

8. मां लक्ष्मी को अर्पित करें कमल का फूल

मां लक्ष्मी की पूजा में कमल के फूल का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक चित्रों और परंपराओं में माता को कमल पर विराजमान दिखाया जाता है। इसलिए पूजा के दौरान कमल का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। यदि कमल का फूल उपलब्ध हो, तो उसे श्रद्धापूर्वक माता के चरणों में अर्पित करें। फूल उपलब्ध नहीं होने पर अपनी सुविधा के अनुसार दूसरे ताजे फूल भी चढ़ा सकते हैं। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और भक्ति का भाव माना जाता है। इसलिए किसी विशेष सामग्री की अनुपलब्धता को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।

9. मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आरती करें

शरद पूर्णिमा पर पूजा-अर्चना के बाद मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आरती करने की परंपरा भी प्रचलित है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की संयुक्त पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। पूजा के अंत में दीपक जलाकर आरती करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें और परिवार के सभी सदस्यों के मंगल की कामना करें। आरती के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांट सकते हैं। इस तरह परिवार के साथ मिलकर पूजा करने से धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।

शरद पूर्णिमा पर पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • पूजा स्थल को साफ रखें और श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
  • चंद्रदेव को अर्घ्य देने के लिए स्थानीय चंद्रोदय समय का ध्यान रखें।
  • खीर और अन्य भोग स्वच्छता से तैयार करें।
  • दीपक जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • दान-पुण्य अपनी क्षमता के अनुसार करें।
  • पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग एवं पारिवारिक परंपराओं का पालन करें।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .