धर्म संवाद / डेस्क : Shardiya Navratri 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होने जा रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना के साथ पूजा की शुरुआत होती है। भक्त इस दौरान मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
यह भी पढे : अयोध्या राम मंदिर की सीता रसोई में ड्रेस कोड लागू
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:31 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से मानी जाएगी।
- नवरात्र प्रारंभ: 11 अक्टूबर 2026, रविवार
- कलश स्थापना का शुभ समय: सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
मुहूर्त स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार कुछ अलग हो सकता है।
Navratri में कैसे करें कलश स्थापना?
Navratri के पहले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा की परंपरा के अनुसार कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखा जाता है। कलश के पास जौ बोए जाते हैं और दीपक जलाकर मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
पूजा के दौरान फल, फूल, अक्षत, रोली, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ या मंत्र-जाप भी करते हैं।
दुर्गा अष्टमी, महानवमी और दशहरा कब?
Navratri के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि पर विशेष पूजा की जाती है। कई परिवार अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन करते हैं। इसके बाद विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाता है। इन तिथियों के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग से पुष्टि करना उचित रहेगा, क्योंकि तिथि और पूजा का समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है।
मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की होती है पूजा
नवरात्र के नौ दिनों में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भक्त इन दिनों व्रत रखकर और पूजा-अर्चना करके मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।






