अयोध्या राम मंदिर की सीता रसोई में ड्रेस कोड लागू

By Tami

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Ayodhya Ram Mandir, Sita Rasoi

धर्म संवाद / डेस्क : अयोध्या राम मंदिर की सीता रसोई में सेवा करने वाले कर्मचारियों के लिए अब निर्धारित वेशभूषा अनिवार्य कर दी गई है। सीता रसोई में कार्यरत कोठारी, भंडारी और सेवक अब बिना निर्धारित ड्रेस के प्रवेश नहीं कर सकेंगे। उन्हें रसोई में सेवा देने से पहले धोती के साथ पीताम्बरी धारण करनी होगी। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों ने निर्धारित वेशभूषा में सेवा देना शुरू कर दिया है।

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरि के निर्देश के बाद सीता रसोई में ड्रेस कोड का पालन शुरू किया गया है। इससे पहले यहां सेवा करने वाले कर्मचारी धोती-कुर्ता पहनकर अपनी जिम्मेदारी निभाते थे। अब रसोई में प्रवेश के समय धार्मिक परंपरा और शुद्धता से जुड़े नियमों के अनुरूप निर्धारित वेशभूषा पहनना जरूरी होगा।

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सीता रसोई में आठ कर्मचारी दो शिफ्ट में देते हैं सेवा

राम मंदिर परिसर के परकोटे में मां अन्नपूर्णा के उप मंदिर के समीप आधुनिक सीता रसोई की व्यवस्था की गई है। यहां कुल आठ कर्मचारी दो शिफ्ट में सेवा करते हैं। इनमें दो कोठारी, चार भंडारी और दो सेवक शामिल हैं।

सीता रसोई में अलग-अलग कर्मचारियों की जिम्मेदारियां भी निर्धारित हैं। भंडारी रामलला और मंदिर परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवताओं के लिए तैयार होने वाले भोग-प्रसाद की व्यवस्था देखते हैं। वहीं कोठारी रसोई में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री का संग्रह और वितरण करते हैं।

सेवक रसोई के दैनिक कार्यों में सहायता करने के साथ साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। नई व्यवस्था के तहत अब इन सभी आठ कर्मचारियों को रसोई में प्रवेश करने से पहले निर्धारित वेशभूषा धारण करनी होगी।

सीईओ ने पहली बार सीता रसोई की व्यवस्थाओं की ली जानकारी

राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र मिश्र ने पहली बार परिसर स्थित सीता रसोई की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने रसोई के भीतर प्रवेश किए बिना वहां की व्यवस्था और संचालन से जुड़ी जानकारी ली।

इस दौरान उन्होंने कोठारी और भंडारी से रसोई के हिसाब-किताब के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने यह भी जाना कि एक महीने में कितनी खाद्य सामग्री की आवश्यकता होती है, कितने लोगों के लिए रसोई तैयार होती है और किन लोगों को यहां से प्रसाद उपलब्ध कराया जाता है। सीईओ ने रसोई की व्यवस्थाओं से संबंधित जरूरी जानकारी लेने के बाद वहां से प्रस्थान किया।

रामलला के पुजारियों से अलग है सीता रसोई का ड्रेस कोड

राम मंदिर में रामलला की पूजा-अर्चना करने वाले पुजारियों के लिए पहले से ही निर्धारित ड्रेस कोड की व्यवस्था है। मंदिर में नियुक्त कई पुजारियों को प्रशिक्षण के बाद सेवा के लिए जिम्मेदारी दी गई है और उनके लिए निर्धारित वेशभूषा का पालन जरूरी है। वहीं मंदिर परिसर के परकोटे में स्थित अलग-अलग उप मंदिरों में सेवा देने वाले पुजारियों और अनुष्ठानकर्ता आचार्यों के लिए व्यवस्था अलग है। उन्हें मानदेय के आधार पर सेवा से जोड़ा गया है और उनके लिए उसी तरह का अनिवार्य ड्रेस कोड लागू नहीं है।

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अब सीता रसोई में सेवा करने वाले कर्मचारियों के लिए भी अलग से वेशभूषा निर्धारित कर दी गई है। कर्मचारी घर से मंदिर तक अपनी सुविधानुसार कपड़े पहन सकते हैं, लेकिन सीता रसोई में प्रवेश के समय धोती और पीताम्बरी पहनना अनिवार्य होगा।

रसोई में शुद्धता और धार्मिक परंपरा पर जोर

सीता रसोई में भोग और प्रसाद से जुड़ा कार्य होने के कारण यहां साफ-सफाई और शुद्धता को विशेष महत्व दिया जाता है। नई वेशभूषा व्यवस्था को भी इसी धार्मिक वातावरण और सेवा की मर्यादा से जोड़कर देखा जा रहा है। रसोई में प्रवेश से पहले कर्मचारियों के निर्धारित वस्त्र धारण करने से सेवा व्यवस्था में एकरूपता भी आएगी। साथ ही मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुरूप रसोई संचालन पर जोर रहेगा।

अयोध्यावासियों के लिए अलग दर्शन मार्ग की मांग

इधर राम मंदिर में प्रतिदिन दर्शन करने वाले अयोध्यावासी गृहस्थों और संतों के लिए अलग दर्शन व्यवस्था की मांग भी उठ रही है। मांग है कि स्थानीय श्रद्धालुओं और संतों के लिए आम श्रद्धालुओं तथा पास धारकों से अलग प्रवेश या दर्शन मार्ग की व्यवस्था की जाए।

हनुमानगढ़ी और कनक भवन जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए अलग व्यवस्था का उदाहरण दिया जा रहा है। इसी आधार पर राम मंदिर में भी अयोध्यावासियों के लिए सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था की मांग की जा रही है। राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए दर्शन व्यवस्था को लेकर लगातार व्यवस्थाओं में बदलाव किए जा रहे हैं। ऐसे में स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए अलग व्यवस्था का मुद्दा भी चर्चा में है।

अयोध्यावासियों के आधार कार्ड से सीधे प्रवेश पर विचार

राम मंदिर में अयोध्या के स्थानीय निवासियों को आधार कार्ड के सत्यापन के बाद सीधे दर्शन की सुविधा देने के विकल्प पर भी विचार चल रहा है। हालांकि ऐसी व्यवस्था लागू करने से पहले सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े पहलुओं पर विचार किया जाना जरूरी होगा।

स्थानीय श्रद्धालुओं की संभावित संख्या का आकलन भी व्यवस्था तैयार करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी के आधार पर यह तय किया जा सकता है कि प्रतिदिन कितने अयोध्यावासी गृहस्थ और संत इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। राम मंदिर में दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा और स्थानीय श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े इन विषयों पर आगे होने वाली बैठकों में चर्चा होने की संभावना है।

FAQ

सीता रसोई में नया ड्रेस कोड क्या है?

सीता रसोई में सेवा करने वाले कर्मचारियों को प्रवेश से पहले धोती के साथ पीताम्बरी धारण करनी होगी।

सीता रसोई में कितने कर्मचारी काम करते हैं?

सीता रसोई में दो शिफ्ट में कुल आठ कर्मचारी सेवा देते हैं। इनमें दो कोठारी, चार भंडारी और दो सेवक शामिल हैं।

सीता रसोई में भंडारी क्या काम करते हैं?

भंडारी रामलला और मंदिर के अन्य देवी-देवताओं के लिए भोग-प्रसाद तैयार करने की व्यवस्था संभालते हैं।

क्या कर्मचारी घर से ही ड्रेस कोड में आएंगे?

नहीं। कर्मचारी घर से मंदिर तक अपनी पसंद के कपड़े पहन सकते हैं, लेकिन सीता रसोई में प्रवेश से पहले निर्धारित धोती और पीताम्बरी पहनना होगा।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .