शोलिंगर में शांत रूप में विराजमान हैं योग नरसिंह, 1305 सीढ़ियां चढ़कर होते हैं दर्शन

By Tami

Published on:

Sholingur Temple, Yoga Narasimha

धर्म संवाद / डेस्क : दक्षिण भारत में भगवान नरसिंह के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन तमिलनाडु के शोलिंगर स्थित श्री योग नरसिंह स्वामी मंदिर की मान्यता और धार्मिक स्वरूप इसे विशेष बनाते हैं। भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को आमतौर पर उग्र स्वरूप में देखा जाता है, लेकिन यहां भगवान शांत और ध्यानमग्न मुद्रा में योग नरसिंह के रूप में विराजमान हैं।

यह भी पढ़े : पानी में डूबा रहता है हनुमान मंदिर, कंधों पर विराजमान हैं राम-लक्ष्मण, 8 महीने नहीं होते दर्शन!

वेल्लोर के निकट स्थित यह धार्मिक स्थल करीब 750 फीट ऊंची पेरिया मलाई पहाड़ी पर बना है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 1,305 पत्थर की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ऊंची पहाड़ी, प्राचीन धार्मिक परंपराएं और भगवान नरसिंह की ध्यान मुद्रा इस स्थान को श्रद्धालुओं के लिए खास बनाती है।

WhatsApp channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Join Now

24 मिनट में प्रकट हुए थे भगवान नरसिंह?

शोलिंगर का प्राचीन नाम तिरुक्कडिगई बताया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां ऋषियों ने भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए तपस्या और ध्यान किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान नरसिंह ने उन्हें दर्शन दिए। मान्यता में कडिगई का संबंध 24 मिनट की अवधि से जोड़ा जाता है। इसी वजह से इस स्थान को तिरुक्कडिगई नाम मिलने की धार्मिक कथा प्रचलित है।

1305 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं योग नरसिंह मंदिर

श्री योग नरसिंह स्वामी मंदिर पहाड़ी के ऊपर स्थित है। श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन के लिए करीब 1,305 पत्थर की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भगवान नरसिंह का ऐसा स्वरूप दिखाई देता है, जिसमें उनका उग्र भाव प्रमुख नहीं है। यहां उन्हें योग नरसिंह, यानी ध्यान और योग की मुद्रा में विराजमान भगवान के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस स्वरूप को भगवान नरसिंह के शांत रूप से जोड़ा जाता है। भक्तों के लिए यह स्थान शक्ति, साधना और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक माना जाता है।

पहाड़ी के नीचे है ब्रह्मतीर्थम सरोवर

मुख्य पहाड़ी के नीचे ब्रह्मतीर्थम, जिसे थक्कन कुलम के नाम से भी जाना जाता है, स्थित है। इस सरोवर से भी एक धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने अपने पांच सिरों में से एक सिर कट जाने के बाद यहां तपस्या की थी। इसी कारण इस जलाशय को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

वरदराज पेरुमल और डोड्डाचार्य से जुड़ी मान्यता

ब्रह्मतीर्थम के आसपास एक अन्य धार्मिक कथा भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, कांचीपुरम के वरदराज पेरुमल गरुड़ पर सवार होकर भक्त डोड्डाचार्य को दर्शन देने पहुंचे थे। कहा जाता है कि डोड्डाचार्य किसी कारण से कांची नहीं पहुंच सके थे। इसी प्रसंग को शोलिंगर की धार्मिक परंपरा से जोड़ा जाता है। कांची के गरुड़ सेवई उत्सव में भी इस कथा की स्मृति का उल्लेख किया जाता है।

See also  सुप्तेश्वर गणेश मंदिर : देश का इकलौता मंदिर जहां कल्कि अवतार में पूजे जाते हैं भगवान गणेश

दूसरी पहाड़ी पर विराजमान हैं योग अंजनयेयार

योग नरसिंह मंदिर वाली मुख्य पहाड़ी के सामने करीब 350 फीट ऊंची एक दूसरी पहाड़ी स्थित है, जिसे चिन्ना मलाई कहा जाता है। इस पहाड़ी पर योग अंजनयेयार यानी हनुमान जी का मंदिर स्थित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी की दृष्टि हमेशा घाटी के दूसरी ओर स्थित योग नरसिंह भगवान की ओर रहती है। इस तरह शोलिंगर में एक ही क्षेत्र में भगवान नरसिंह और हनुमान जी के योग स्वरूपों का विशेष धार्मिक संबंध देखने को मिलता है।

स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं भक्त

शोलिंगर आने वाले श्रद्धालु भगवान योग नरसिंह और योग अंजनयेयार के दर्शन कर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की कामना करते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार, यहां भगवान नरसिंह का शांत स्वरूप भक्तों को आध्यात्मिक स्थिरता और ध्यान का संदेश देता है। नरसिंह अवतार को जहां सामान्य रूप से अधर्म के विनाश और शक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, वहीं शोलिंगर में उनका योग और ध्यानमग्न स्वरूप विशेष आकर्षण का केंद्र है।

शोलिंगर का योग नरसिंह मंदिर क्यों है खास?

  • भगवान नरसिंह यहां शांत और योग मुद्रा में विराजमान माने जाते हैं।
  • मंदिर करीब 750 फीट ऊंची पेरिया मलाई पहाड़ी पर स्थित है।
  • मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 1,305 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
  • प्राचीन नाम तिरुक्कडिगई से जुड़ी धार्मिक मान्यता यहां प्रचलित है।
  • पहाड़ी के नीचे ब्रह्मतीर्थम सरोवर स्थित है।
  • सामने की चिन्ना मलाई पहाड़ी पर योग अंजनयेयार मंदिर है।
  • नरसिंह और हनुमान के योग स्वरूपों का धार्मिक संबंध इस स्थान को विशेष बनाता है।

FAQ

शोलिंगर का योग नरसिंह मंदिर कहां स्थित है?

श्री योग नरसिंह स्वामी मंदिर तमिलनाडु में वेल्लोर के निकट शोलिंगर की पेरिया मलाई पहाड़ी पर स्थित है।

शोलिंगर में भगवान नरसिंह किस रूप में विराजमान हैं?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां भगवान नरसिंह योग नरसिंह, यानी शांत और ध्यानमग्न मुद्रा में विराजमान हैं।

मंदिर तक पहुंचने के लिए कितनी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं?

मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 1,305 पत्थर की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

शोलिंगर का प्राचीन नाम क्या है?

शोलिंगर को प्राचीन धार्मिक परंपरा में तिरुक्कडिगई नाम से भी जोड़ा जाता है।

योग अंजनयेयार मंदिर कहां है?

योग अंजनयेयार का मंदिर मुख्य योग नरसिंह मंदिर के सामने स्थित करीब 350 फीट ऊंची चिन्ना मलाई पहाड़ी पर है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .