धर्म संवाद / डेस्क : मेरठ के सूरजकुंड क्षेत्र में स्थित केवट राज मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय इतिहास और पौराणिक मान्यताओं के कारण भी चर्चा में रहता है। मान्यता है कि इस मंदिर का संबंध रामायण काल से है और यहां भगवान श्रीराम के भक्त केवट की स्मृति जुड़ी हुई है। मंदिर से जुड़ी प्राचीन कलाकृतियों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर लोगों की खास आस्था है।
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रामायण से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रामायण में केवट का महत्वपूर्ण स्थान है। माना जाता है कि केवट ने वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराने में मदद की थी। इसी वजह से केवट को भगवान श्रीराम का अनन्य भक्त माना जाता है।
मेरठ के सूरजकुंड स्थित केवट राज मंदिर को इसी धार्मिक परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, मंदिर के रामायण काल से सीधे जुड़े होने के दावे को ऐतिहासिक प्रमाण के रूप में स्वीकार करने से पहले उपलब्ध पुरातात्विक और ऐतिहासिक साक्ष्यों को अलग से देखना जरूरी है।
मंदिर में श्रद्धालुओं की रहती है आस्था
सूरजकुंड क्षेत्र में मौजूद यह मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक महत्व रखता है। यहां समय-समय पर धार्मिक कार्यक्रम और पूजा-अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। मंदिर से जुड़े आयोजनों का उल्लेख स्थानीय सोशल मीडिया स्रोतों में भी मिलता है।
प्राचीन कलाकृति भी बनी आकर्षण का केंद्र
सूरजकुंड मंदिर क्षेत्र से जुड़ी एक प्राचीन कलाकृति में रामायण से संबंधित दृश्य दिखाई देने की चर्चा भी सामने आई है। इससे इस स्थान के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को लेकर लोगों की रुचि बढ़ी है।
मेरठ के धार्मिक स्थलों में खास पहचान
मेरठ में कई ऐसे प्राचीन धार्मिक स्थल हैं, जिनसे अलग-अलग पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। केवट राज मंदिर भी इसी धार्मिक विरासत का हिस्सा माना जाता है। स्थानीय स्तर पर ऐसे मंदिरों को संरक्षित करने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।






