Nag Panchami 2026: 23 साल बाद दुर्लभ संयोग, जानें पूजा मुहूर्त और महत्व

By Tami

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Nag Panchami 2026

धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में नाग पंचमी का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। वर्ष 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। इस बार यह पर्व कई मायनों में बेहद खास है, क्योंकि लगभग 23 साल बाद नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और नाग देवता की पूजा-अर्चना करने से कालसर्प दोष, पितृ दोष और अन्य ग्रह दोषों से राहत मिलने की मान्यता है।

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नाग पंचमी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि का आरंभ 16 अगस्त 2026 को शाम 4:52 बजे होगा और इसका समापन 17 अगस्त 2026 को शाम 5:00 बजे होगा।

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  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 16 अगस्त 2026, शाम 4:52 बजे
  • पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2026, शाम 5:00 बजे
  • नाग पंचमी पर्व: 17 अगस्त 2026, सोमवार

हिंदू धर्म में त्योहार सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं। इसलिए 17 अगस्त को सूर्योदय के समय पंचमी तिथि होने के कारण इसी दिन नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।

23 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग

इस वर्ष नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का शुभ संयोग बन रहा है। इससे पहले ऐसा विशेष संयोग वर्ष 2003 में बना था। सावन सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है, जबकि नाग पंचमी नाग देवता की आराधना का पर्व है। एक ही दिन दोनों पर्वों का मिलन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।

नाग पंचमी 2026 पर बन रहे शुभ योग

नाग पंचमी के दिन कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ गया है।

  • शुभ योग
  • शुक्ल योग
  • रवि योग
  • हंसराज योग (गुरु के उच्च राशि में होने से)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन शुभ योगों में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और विभिन्न दोषों का निवारण होता है।

नाग पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त 2026

नाग पंचमी पर पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना गया है।

मुख्य पूजा मुहूर्त

सुबह 5:50 बजे से 8:28 बजे तक

इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से नाग देवता और भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।

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अन्य शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: 04:25 AM से 05:09 AM
  • अभिजीत मुहूर्त: 12:00 PM से 12:52 PM
  • विजय मुहूर्त: 02:37 PM से 03:29 PM
  • गोधूलि मुहूर्त: 06:59 PM से 07:21 PM
  • रवि योग: 05:52 AM से 08:04 AM

पंचमी तिथि पर क्यों की जाती है नाग देवता की पूजा?

ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक तिथि का एक अधिष्ठाता देव माना गया है। पंचमी तिथि के अधिष्ठाता नाग देवता हैं, इसलिए इस दिन नाग पूजा का विशेष महत्व होता है।

सावन भगवान शिव का प्रिय महीना है और शिवजी का नागों से गहरा संबंध माना जाता है। भगवान शिव अपने गले में नागराज वासुकी को धारण करते हैं। वहीं भगवान विष्णु शेषनाग पर विराजमान रहते हैं। इसी कारण सावन मास की पंचमी तिथि नाग पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।

नाग पंचमी पर पूजा कैसे करें?

नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु भगवान शिव और नाग देवता की पूजा कर सकते हैं।

पूजा सामग्री

  • जल
  • दूध
  • बेलपत्र
  • धतूरा
  • आक के पुष्प
  • हल्दी
  • कुश
  • फूल

पूजा विधि

  1. सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
  3. शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध और धतूरा अर्पित करें।
  4. नाग देवता की प्रतिमा या चित्र की पूजा करें।
  5. हल्दी, पुष्प और दूध अर्पित करें।
  6. शिव मंत्र और नाग स्तुति का जाप करें।
  7. परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की प्रार्थना करें।

राहुकाल और भद्रा का समय

राहुकाल

सुबह 7:31 बजे से 9:09 बजे तक

राहुकाल में सामान्य शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। हालांकि राहु-केतु और कालसर्प दोष से संबंधित उपाय एवं शिव पूजा इस दौरान की जा सकती है।

भद्रा

नाग पंचमी 2026 के दिन भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा, जिससे श्रद्धालु बिना किसी चिंता के पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

सावन सोमवार और नाग पंचमी का महत्व

सावन सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ दिनों में माना जाता है। वहीं नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा से परिवार की रक्षा, संतान सुख और धन-धान्य की प्राप्ति होने की मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवजी और नाग देवता दोनों की संयुक्त पूजा से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

नाग पंचमी पर क्या न करें?

  • जीवित सांप को दूध पिलाने का प्रयास न करें।
  • भूमि की खुदाई करने से बचें।
  • किसी भी जीव-जंतु को कष्ट न पहुंचाएं।
  • पूजा के दौरान क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .