धर्म संवाद / डेस्क : सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। साल 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त, शनिवार को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इस बार हरियाली तीज और स्वतंत्रता दिवस एक ही दिन पड़ रहे हैं।
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हरियाली तीज हिंदू धर्म में महिलाओं के प्रमुख व्रत-पर्वों में से एक है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने की कामना से हरियाली तीज का व्रत कर सकती हैं।
हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
इसी कारण हरियाली तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन से जोड़कर देखा जाता है। यह पर्व प्रेम, समर्पण, वैवाहिक सुख और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। सावन के महीने में चारों ओर हरियाली छाने के कारण इस तीज को हरियाली तीज कहा जाता है।
हरियाली तीज 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष तृतीया तिथि का आरंभ 14 अगस्त 2026 की शाम 6:46 बजे से होगा और तिथि 15 अगस्त 2026 की शाम 5:28 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त, शनिवार को रखा जाएगा।
पूजा का शुभ समय: 15 अगस्त को सूर्योदय से सुबह 9:08 बजे तक का समय पूजा के लिए शुभ माना गया है।
पूजा का समय स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
पहली बार हरियाली तीज का व्रत रखने वाली महिलाएं ऐसे करें पूजा
अगर आप पहली बार हरियाली तीज का व्रत रखने जा रही हैं, तो पूजा की शुरुआत श्रद्धा और संकल्प के साथ करें।
1. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
2. पूजा स्थल तैयार करें
घर के पूजा स्थान की सफाई करके चौकी स्थापित करें। चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। परंपरा के अनुसार मिट्टी या बालू से भी शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाई जा सकती है।
3. माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें
हरियाली तीज पर माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। इसमें सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां, चुनरी और अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल की जा सकती है।
4. भगवान शिव को ये चीजें चढ़ाएं
भगवान शिव को जल, बेलपत्र, फूल, अक्षत और परंपरा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव की विधिवत पूजा करें।
5. हरियाली तीज की कथा पढ़ें
पूजा के दौरान हरियाली तीज की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
6. बुजुर्गों का आशीर्वाद लें
पूजा पूरी होने के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है।
हरियाली तीज पर सोलह श्रृंगार का महत्व
हरियाली तीज पर सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन मेहंदी लगाती हैं, हरी चूड़ियां पहनती हैं और पारंपरिक परिधान में श्रृंगार करती हैं। कई जगहों पर मायके से महिलाओं के लिए सिंधारा भेजने की परंपरा भी है। इसमें साड़ी, चूड़ियां, मिठाई, मेहंदी और श्रृंगार का सामान शामिल किया जाता है। हरे रंग को सावन और हरियाली से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इस दिन हरे रंग की साड़ी, चूड़ियां या अन्य वस्त्र पहनने की परंपरा कई क्षेत्रों में लोकप्रिय है।
हरियाली तीज पर झूला झूलने की परंपरा
हरियाली तीज के मौके पर झूला झूलना एक लोकप्रिय लोक परंपरा है। मान्यता है कि माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन की खुशी में सखियों ने माता पार्वती के लिए झूला डाला था। इसी परंपरा के चलते आज भी महिलाएं और युवतियां तीज के अवसर पर झूला झूलती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं।
हालांकि, झूला झूलना पूजा या व्रत के लिए अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है, बल्कि यह पर्व से जुड़ी लोक-सांस्कृतिक परंपरा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा सहित कई क्षेत्रों में हरियाली तीज पर झूला झूलने की खास परंपरा देखने को मिलती है।
क्या कुंवारी कन्याएं भी रख सकती हैं हरियाली तीज का व्रत?
हां, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंवारी कन्याएं भी हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं। वे भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं। वहीं, विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं।
हरियाली तीज पर क्या करें?
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
- माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
- भगवान शिव को बेलपत्र और जल चढ़ाएं।
- हरियाली तीज की कथा पढ़ें या सुनें।
- धूप-दीप जलाकर आरती करें।
- घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
- अपनी परंपरा के अनुसार दान-पुण्य करें।
हरियाली तीज पर किन बातों का रखें ध्यान?
व्रत रखने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। निर्जला व्रत हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होता। यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, गर्भावस्था है या डॉक्टर ने उपवास से मना किया है, तो बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत न रखें। धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी जरूरी है।






