Jagannath Rath Yatra 2026: रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाएं ये 5 प्रिय फूल, पूरी होगी हर मनोकामना

By Tami

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Jagannath Rath Yatra 2026 favourite-flowers

धर्म संवाद / डेस्क : जगन्नाथ रथयात्रा मेला 16 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक उत्सव में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। रथयात्रा केवल पुरी या काशी तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है।

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रथयात्रा के दौरान भक्त भगवान जगन्नाथ को तुलसी, नानखटाई और विभिन्न प्रकार के पुष्प अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ विशेष फूल ऐसे हैं, जिन्हें अर्पित करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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भगवान जगन्नाथ को कौन-से फूल हैं सबसे प्रिय?

1. कुमकुमी कमल (लाल कमल)

शास्त्रों के अनुसार यदि भगवान जगन्नाथ को 100 लाल कमल के फूल या 100 कमल के पत्ते अर्पित किए जाएं तो वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि इससे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है और जीवन की बड़ी बाधाएं दूर होती हैं।

2. कुंभी का फूल

रथयात्रा के दौरान भगवान को कुंभी पुष्प अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इसका फल स्वर्ण दान के बराबर मिलता है। इससे धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

3. केतकी का फूल

यदि कोई भक्त अपने जीवन के पापों से मुक्ति की कामना करता है, तो उसे भगवान जगन्नाथ को केतकी का फूल अर्पित करना चाहिए। शास्त्रों में इसे तुलसी के समान प्रिय बताया गया है और इसे अर्पित करने से सात जन्मों के पापों के नाश की मान्यता है।

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4. मोगरा (मगरई) का सफेद पुष्प

भगवान जगन्नाथ को सफेद मोगरा भी अत्यंत प्रिय माना जाता है। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए मोगरे के फूल या 108 फूलों की माला अर्पित करते हैं। इससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

5. तुलसी दल

भगवान जगन्नाथ की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। तुलसी दल अर्पित करने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है और हर पूजा पूर्ण मानी जाती है।

कब से शुरू होगी रथयात्रा?

हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू होती है। पुरी में यह महोत्सव 9 दिनों तक चलता है, जबकि काशी में रथयात्रा का आयोजन तीन दिनों तक किया जाता है। देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार इसकी अवधि 3 से 9 दिनों तक हो सकती है।

लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ती है भीड़

हर वर्ष पुरी और काशी में आयोजित रथयात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन करते हैं। मान्यता है कि रथ पर विराजमान भगवान के दर्शन और रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .