आषाढ़ अमावस्या 2026 पर बनेगा दुर्लभ संयोग, मिलेगा सोमवती और भौमवती अमावस्या दोनों का पुण्य

By Tami

Published on:

Aashadh Amavasya 2026

धर्म संवाद / डेस्क : सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन पितरों के तर्पण, दान-पुण्य और विशेष पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार की आषाढ़ अमावस्या कई मायनों में बेहद खास और दुर्लभ रहने वाली है। इसकी वजह है एक ऐसा अद्भुत संयोग, जो हर वर्ष देखने को नहीं मिलता।

यह भी पढ़े : इस दिन भूलकर भी न करें पीपल के पेड़ की पूजा

इस बार अमावस्या तिथि सोमवार शाम से शुरू होकर मंगलवार तक रहेगी। ऐसे में श्रद्धालुओं को एक ही अमावस्या में सोमवती अमावस्या और भौमवती अमावस्या दोनों का पुण्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है।

WhatsApp channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Join Now

क्यों खास है इस बार की आषाढ़ अमावस्या?

आमतौर पर अमावस्या किसी एक वार के साथ ही जुड़ती है, लेकिन इस बार तिथि का आरंभ सोमवार को होगा और इसका प्रभाव मंगलवार तक रहेगा। यही कारण है कि इस बार सोमवती और भौमवती अमावस्या दोनों का विशेष महत्व एक साथ देखने को मिलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे दुर्लभ योग में किए गए स्नान, दान, जप, तप, तर्पण और पूजा-पाठ का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?

देवघर के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह संयोग वास्तव में बेहद दुर्लभ है। हालांकि सनातन परंपरा में उदयातिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से 14 जुलाई, मंगलवार को आषाढ़ अमावस्या का मुख्य पर्व माना जाएगा। इस दिन पितरों का तर्पण, दान और पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

आषाढ़ अमावस्या पर कैसे करें पूजा?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु, भगवान शिव और अपने पितरों का स्मरण करना चाहिए।

See also  क्रिसमस ट्री का चलन कब शुरू हुआ, क्यों लगाते हैं इसे घर पर

इसके बाद:

  • पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करें।
  • विधि-विधान से पीपल की पूजा करें।
  • पीपल की परिक्रमा करें।
  • जरूरतमंदों को दान दें।
  • पितरों के नाम से तर्पण करें।
  • भगवान विष्णु और शिव जी की आराधना करें।

मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

मौन व्रत रखने का विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि संभव हो तो आषाढ़ अमावस्या के दिन मौन व्रत रखना चाहिए। माना जाता है कि मौन रहकर की गई पूजा मन को शांत करती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। इससे परिवार में शांति, सौहार्द और समृद्धि बनी रहती है।

राहु और पितृ दोष से पीड़ित लोग करें ये उपाय

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में राहु पंचम भाव में स्थित है, या जो राहु के अशुभ प्रभाव, पितृ दोष अथवा जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं से परेशान हैं, उनके लिए यह अमावस्या विशेष महत्व रखती है।

ऐसे लोग इस दिन:

  • राहु शांति पूजा करा सकते हैं।
  • पितृ दोष निवारण अनुष्ठान कर सकते हैं।
  • पूर्वजों के नाम से तर्पण और पिंडदान कर सकते हैं।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान दे सकते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन उपायों से जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

आषाढ़ अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व

आषाढ़ अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर भी मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए धार्मिक कार्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाले माने जाते हैं।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .