Ashadha Gupt Navratri 2026: 12 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग

By Tami

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Ashadha Gupt Navratri 2026 Gaj Kesari Yog

धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षभर में कुल चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें दो प्रकट और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। आषाढ़ माह में आने वाली गुप्त नवरात्रि शक्ति साधना, मंत्र सिद्धि और देवी उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का आरंभ कई दुर्लभ और शुभ योगों के संयोग में होने जा रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

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कब से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026?

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि का आरंभ होगा। इस वर्ष गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 तक चलेगी। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों और दस महाविद्याओं की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

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12 साल बाद बन रहा है दुर्लभ संयोग

उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य अमर डब्बावाला के अनुसार, इस बार गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ गजकेसरी योग और बुध पुष्य योग जैसे अत्यंत शुभ संयोगों में हो रहा है।

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15 जुलाई को बुधवार का दिन, पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि में चंद्रमा की स्थिति रहेगी। चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग बनेगा। ज्योतिष शास्त्र में यह योग समृद्धि, सफलता और शुभ फल देने वाला माना जाता है। चूंकि गुरु लगभग 12 वर्षों में एक बार किसी राशि में पुनः प्रवेश करता है, इसलिए यह संयोग बेहद विशेष माना जा रहा है।

साधना और देवी उपासना के लिए सबसे शुभ समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ और माघ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। यह पर्व विशेष रूप से तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि, देवी आराधना और आध्यात्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में विधि-विधान से मां दुर्गा और दस महाविद्याओं की पूजा करने से साधकों को विशेष कृपा प्राप्त होती है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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गुप्त नवरात्रि में बनेंगे कई शुभ योग

इस बार गुप्त नवरात्रि के दौरान कई शुभ योगों का निर्माण होगा, जिनमें शामिल हैं:

  • 2 सर्वार्थ सिद्धि योग
  • 3 रवि योग
  • गजकेसरी योग
  • बुध पुष्य योग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन शुभ योगों में नई शुरुआत, निवेश, बैंकिंग कार्य, टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोजेक्ट, कार्यालय स्थानांतरण और व्यापारिक निर्णय लेना शुभ माना जाता है।

साल में कितनी बार आती है नवरात्रि?

श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के अनुसार, वर्षभर में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं—

  1. चैत्र नवरात्रि (प्रकट नवरात्रि)
  2. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि
  3. अश्विन शारदीय नवरात्रि (प्रकट नवरात्रि)
  4. माघ गुप्त नवरात्रि

इनमें आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है, जबकि चैत्र और शारदीय नवरात्रि को प्रकट नवरात्रि माना जाता है।

गुप्त नवरात्रि में होती है दस महाविद्याओं की पूजा

गुप्त नवरात्रि में विशेष रूप से देवी के दस महाविद्या स्वरूपों की आराधना की जाती है। इनमें शामिल हैं:

  • मां काली
  • मां तारा
  • मां त्रिपुर सुंदरी
  • मां भुवनेश्वरी
  • मां छिन्नमस्ता
  • मां भैरवी
  • मां धूमावती
  • मां बगलामुखी
  • मां मातंगी
  • मां कमला

मान्यता है कि इनकी पूजा और साधना से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि को आध्यात्मिक उन्नति और आत्मिक शक्ति प्राप्त करने का पर्व माना जाता है। इस दौरान साधक तंत्र, मंत्र और यंत्र साधना के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक साधना को मजबूत करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .