धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में खरमास (Kharmas 2025) को अत्यंत विशेष और संवेदनशील काल माना गया है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन संस्कार और नए कार्यों की शुरुआत को शास्त्रों में वर्जित बताया गया है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, खरमास के दौरान किए गए मांगलिक कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं या उनका फल अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिलता।
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खरमास क्यों माना जाता है अशुभ?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की शुरुआत होती है। इस समय सूर्य की ऊर्जा को सामान्य की तुलना में मंद या स्थिर माना गया है। सूर्य को सभी ग्रहों की आत्मा कहा गया है और उनकी स्थिति ग्रहों व नक्षत्रों के शुभ प्रभाव को प्रभावित करती है।
जब सूर्य की ऊर्जा कमजोर होती है, तो नए आरंभ का फल उतना स्थायी और सफल नहीं होता, जितना सामान्य समय में होता है। इसी कारण शास्त्रों में इस अवधि में शुभ कार्यों को टालने की परंपरा रही है।
देवताओं के विश्राम का काल

पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में खरमास को देवताओं के विश्राम का समय भी बताया गया है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान सूर्य और अन्य देवताओं की ऊर्जा स्थिर रहती है। ऐसे में किए गए मांगलिक कार्य दीर्घकालिक फल नहीं दे पाते और ग्रह दशा में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
क्या खरमास पूरी तरह निष्प्रभावी है?
बिल्कुल नहीं। खरमास को अशुभ नहीं बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर माना गया है। यह समय बाहरी गतिविधियों से हटकर आत्मचिंतन, संयम और साधना के लिए अत्यंत शुभ होता है।
खरमास में क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में निम्न कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं—
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान
- सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करना
- मंत्र-जप, ध्यान और योग अभ्यास
- दान और सेवा — तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र या जरूरतमंदों की सहायता
इन कार्यों से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक बल भी बढ़ता है।
संयम और आत्मनिरीक्षण का समय
खरमास का मूल उद्देश्य जीवन में संयम, करुणा और पवित्रता को बढ़ावा देना है। नए कार्यों को भले ही टाल दिया जाए, लेकिन इस काल में की गई साधना और आत्मनिरीक्षण आने वाले समय के लिए मजबूत और शुभ आधार तैयार करता है।
FAQs (People Also Ask – Google Friendly)
खरमास क्या होता है?
खरमास वह अवधि है जब सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं और उनकी ऊर्जा मंद मानी जाती है।
खरमास में विवाह क्यों नहीं होता?
ज्योतिष के अनुसार इस समय ग्रहों का शुभ प्रभाव कम हो जाता है, जिससे मांगलिक कार्यों में बाधा आ सकती है।
खरमास में कौन-कौन से कार्य वर्जित हैं?
विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, नया व्यवसाय और अन्य शुभ संस्कार।
खरमास में क्या करना शुभ माना जाता है?
ध्यान, योग, मंत्र-जप, सूर्य अर्घ्य, दान-पुण्य और सेवा कार्य।
क्या खरमास अशुभ समय है?
नहीं, यह आध्यात्मिक उन्नति और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है।
निष्कर्ष
खरमास कोई निषेधात्मक काल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक संतुलन और आंतरिक विकास का अवसर है। शास्त्रों की मर्यादा का पालन करते हुए यदि इस समय को साधना, दान और सेवा में लगाया जाए, तो यह जीवन को नई दिशा और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।






