नागा साधु अपने पूरे शरीर पर भस्म लगाते हैं 

दरअसल नग्न अवस्था मे भस्मी या भभूत ही उनका वस्त्र होता है।

यह साधु अपने शरीर को एक अस्थायी और नश्वर वस्तु मानते हैं। राख का शरीर पर लगाना इस बात का प्रतीक है कि वे भौतिक शरीर और सांसारिक वासनाओं से परे हैं।

इसके अलावा भभूत को शिव का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि भगवान शिव अक्सर भभूत (राख) लगाते हैं।

भभूत शरीर को शुद्ध करने का एक उपाय भी मानी जाती है। यह मानसिक और शारीरिक शुद्धता की ओर संकेत करती है, जिससे साधु अपने आत्मिक विकास में अग्रसर होते हैं।

नागा साधु का जीवन संयम और तपस्या से भरा होता है। भभूत को शरीर पर लगाना उनके वैराग्य (संसार से दूर रहने की भावना) का प्रतीक है।

भभूत के उपयोग से साधु को अपनी आध्यात्मिक यात्रा में एक गहरी चेतना और ध्यान केंद्रित करने की स्थिति प्राप्त होती है।