धर्म संवाद/डेस्क : भाद्रपद की अमावस्या 23 अगस्त, शनिवार को है। जब शनिवार को ये तिथि आती है तो इसे शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं। भादौ मास की अमावस्या को पिठोरी और कुशग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है। शनिवार और अमावस्या के योग में शनिदेव का सरसों के तेल से अभिषेक करना चाहिए।
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शनिश्चरी अमावस्या पर शनि पूजा करने का विशेष महत्व है। शनिदेव कर्म फल दाता माने जाते हैं यानी यही ग्रह हमारे कर्मों का शुभ-अशुभ फल देता है। शनि सूर्य और छाया के पुत्र हैं। नवग्रहों में शनि न्यायाधीश माना जाता है, इसलिए इन्हें अनुशासन, तपस्या, संयम, और न्याय का देवता कहते हैं।
शनि पूजा से शांत होते हैं कुंडली के शनि दोष
जिन लोगों की कुंडली में शनि से जुड़ा कोई दोष है या जिनकी लोगों की राशियों पर साढ़ेसाती, ढय्या चल रही है, उनके लिए ये दिन बहुत ही शुभ है। शनि दोषों को शांत करने के लिए शनिश्चरी अमावस्या पर शनिदेव का अभिषेक करना चाहिए।
पितरों की शांति के लिए करें धूप-ध्यान
अमावस्या तिथि के स्वामी पितर देवता माने जाते हैं, इसलिए इस तिथि पर पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध और धूप-ध्यान करने से पितर देव प्रसन्न होते हैं और उनके आशीर्वाद से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन गंगाजल से स्नान करके अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करना श्राद्ध कर्म करते हैं तो पितरों को शांति मिलती है।
शनिश्चरी अमावस्या की पौराणिक कथा
शनि देव ने तपस्या करके भगवान से वरदान प्राप्त किया था कि वे मनुष्यों के कर्मों के अनुसार उन्हें फल देंगे। एक बार किसी राजा ने शनि देव का अपमान कर दिया। परिणामस्वरूप शनि देव ने राजा की संपत्ति, राज्य, परिवार सब कुछ छीन लिया। इसके बाद राजा को अपनी गलती का अहसास हो गया। तब विद्वानों ने राजा को शनिश्चरी अमावस्या पर शनि पूजा करने की सलाह दी। जब राजा ने शनिश्चरी अमावस्या पर शनि देव की पूजा की, उपवास किया और क्षमा मांगी, तब शनि देव ने प्रसन्न होकर उसे सब कुछ फिर से लौटा दिया।
शनिश्चरी अमावस्या कर सकते हैं ये शुभ काम
शनिदेव ग्रहों के न्यायाधीश हैं। शनि की स्थिति व्यक्ति के जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव लाती है। कुंडली में शनि की स्थिति ठीक न हो तो व्यक्ति को कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल पाती है, छोटे-छोटे कामों में बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। मन अशांत रहता है और निर्णय लेने में संदेह बना रहता है। इस परेशानियों से बचने के लिए हर शनिवार और शनिश्चरी अमावस्या पर शनि की विशेष पूजा करनी चाहिए।
- इस दिन शनि मंदिर में तेल, नीले फूल, काले तिल, और उड़द दाल चढ़ाई जाती है। शनि चालीसा और शनि स्तोत्र का पाठ किया जाता है।
- काले तिल, काला कपड़ा, लोहे के बर्तन, छाता, चप्पल, उड़द की दाल और तेल दान करना चाहिए। गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न दान करना पुण्यकारी होता है।
- इस तिथि पर पीपल पर जल अर्पित करके दीपक जलाने की परंपरा है। शनिश्चरी अमावस्या पर व्रत रख सकते हैं। इस व्रत से धर्म लाभ के साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं।
- इस दिन झूठ न बोलें, किसी के साथ छल या धोखा न करें, मांस-मदिरा का सेवन न करें, किसी का अपमान न करें। इन बातों का ध्यान रखेंगे तो शनि दोषों को शांत किया जा सकता है और शनि की कृपा से जीवन में सुख-शांति प्राप्त की जा सकती है।






