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Sharad Purnima 2026: खीर नहीं बना पा रहे हैं तो भी न छूटे पूजा, मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें ये 5 उपाय

By Tami

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Sharad Purnima Puja Vidhi, Lakshmi Puja

धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के महारास, चंद्रदेव की उपासना और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी चांदनी विशेष मानी जाती है।

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शरद पूर्णिमा का पर्व नजदीक आते ही घरों में पूजा-पाठ और धार्मिक तैयारियां शुरू हो जाती हैं। हालांकि, कई बार समय की कमी या अन्य कारणों से लोग खीर नहीं बना पाते हैं। ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में श्रद्धा और भक्ति का विशेष महत्व है। आप बिना खीर बनाए भी मां लक्ष्मी की आराधना कर सकते हैं और चंद्रदेव को अर्घ्य देकर इस पर्व को मना सकते हैं।

इस दिन दीपदान, मंत्र जाप, ध्यान और जरूरतमंदों को दान देने जैसे धार्मिक कार्य भी किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं कि शरद पूर्णिमा पर खीर नहीं बना पाने की स्थिति में किन आसान तरीकों से पूजा-अर्चना की जा सकती है।

शरद पूर्णिमा 2026 कब है? जानें शुभ मुहूर्त

शरद पूर्णिमा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में इसकी तिथि और पूजा के समय को लेकर स्थानीय पंचांग का ध्यान रखना जरूरी है।

उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 11 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक बताई जा रही है। चंद्रोदय का समय शाम करीब 5 बजे और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए निशिता काल रात 11 बजकर 40 मिनट से 26 अक्टूबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक बताया गया है।

ध्यान दें: पूजा का सही समय निर्धारित करने से पहले अपने क्षेत्र के विश्वसनीय पंचांग से तिथि, चंद्रोदय और निशिता काल की पुष्टि जरूर करें। अलग-अलग स्थानों पर समय में अंतर हो सकता है।

खीर नहीं बना सकते तो शरद पूर्णिमा पर करें ये 5 आसान उपाय

1. मां लक्ष्मी के सामने जलाएं घी का दीपक

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। यदि आप खीर नहीं बना पा रहे हैं, तो शाम के समय घर के पूजा स्थल की सफाई करके मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जला सकते हैं। इसके बाद माता को फूल अर्पित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार फल, मिश्री या कोई अन्य मिठाई भोग में चढ़ाएं।

पूजा के दौरान परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता लक्ष्मी की आराधना से घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

2. चंद्रदेव को अर्घ्य देकर करें प्रार्थना

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव के दर्शन करके उन्हें जल अर्पित कर सकते हैं। इसके लिए एक साफ लोटे में जल लें और श्रद्धापूर्वक चंद्रदेव को अर्घ्य दें। इस दौरान मन को शांत रखते हुए परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-शांति की प्रार्थना करें। यदि आप खीर नहीं बना पा रहे हैं, तो चंद्रदेव को अर्घ्य देना और अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रार्थना करना भी पर्व मनाने का एक आसान तरीका हो सकता है।

3. घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर करें दीपदान

शरद पूर्णिमा की शाम घर के मंदिर, आंगन या मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा भी कई परिवारों में प्रचलित है। आप अपनी सुविधा के अनुसार एक या अधिक दीपक जला सकते हैं। दीपदान करते समय मां लक्ष्मी का स्मरण करें और घर में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करें। दीपक को हमेशा सुरक्षित स्थान पर रखें और उसे जलता हुआ छोड़कर न जाएं। पर्दों, कागजों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दीपक को दूर रखें। इस तरह बिना किसी विशेष सामग्री के भी आप घर में धार्मिक वातावरण बना सकते हैं।

4. मां लक्ष्मी के मंत्रों का करें जाप

यदि आपके पास पूजा की सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो शरद पूर्णिमा पर कुछ समय मंत्र जाप और ध्यान के लिए निकाल सकते हैं। धार्मिक परंपराओं में मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप शुभ माना जाता है।

आप अपनी श्रद्धा के अनुसार इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

शांत मन से बैठकर अपनी सुविधा के अनुसार मंत्र का जाप करें। इसके बाद कुछ समय ध्यान और प्रार्थना में बिताएं। परिवार के सदस्यों के साथ भजन-कीर्तन करना भी इस अवसर को विशेष बना सकता है।

5. जरूरतमंदों को दान देकर मनाएं शरद पूर्णिमा

हिंदू धर्म में पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। शरद पूर्णिमा पर आप अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, फल, कपड़े या दैनिक उपयोग की जरूरी वस्तुएं दान कर सकते हैं। यदि आप अधिक खर्च नहीं करना चाहते, तो किसी जरूरतमंद को भोजन कराना या उसकी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करना भी अच्छा विकल्प है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सेवा और दान-पुण्य को शुभ कार्य माना जाता है। इसलिए शरद पूर्णिमा पर अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार किसी की सहायता करके भी पर्व की भावना को आत्मसात किया जा सकता है।

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाना क्यों माना जाता है खास?

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर रात में चांदनी के नीचे रखने की परंपरा लंबे समय से प्रचलित है। कई परिवारों में खीर को अगले दिन प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणों का विशेष महत्व होता है।

हालांकि, खीर बनाना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी कारण से आप खीर नहीं बना सकते, तो अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं। दीपक जलाना, चंद्रदेव को अर्घ्य देना, मंत्र जाप करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी इस पर्व से जुड़े धार्मिक कार्य हैं।

शरद पूर्णिमा की पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • पूजा स्थल को साफ रखें और श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
  • चंद्रदेव को अर्घ्य देने के लिए चंद्रोदय के समय का ध्यान रखें।
  • मां लक्ष्मी को अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करें।
  • मंत्र जाप और ध्यान के दौरान मन को शांत रखने का प्रयास करें।
  • दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • दान-पुण्य अपनी क्षमता के अनुसार ही करें।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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