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पानी में डूबा रहता है हनुमान मंदिर, कंधों पर विराजमान हैं राम-लक्ष्मण, 8 महीने नहीं होते दर्शन!

By Tami

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Karauli Hanuman Temple

धर्म संवाद / डेस्क : राजस्थान में भगवान हनुमान के कई प्राचीन और चमत्कारी मंदिरों से जुड़ी मान्यताएं प्रसिद्ध हैं। लेकिन करौली जिले में स्थित एक हनुमान मंदिर अपनी अनोखी प्रतिमा और पानी में डूबे रहने की वजह से खास आकर्षण का केंद्र है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर साल के अधिकांश समय पानी से घिरा रहता है और बरसात के मौसम में तो पूरा मंदिर ही जलमग्न हो जाता है।

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इसके बावजूद मंदिर वर्षों से उसी स्थान पर मौजूद है। खास बात यह है कि मंदिर में विराजमान हनुमान जी की प्रतिमा में दोनों कंधों पर भगवान राम और लक्ष्मण विराजमान दिखाई देते हैं। स्थानीय मान्यता इसे रामायण के अहिरावण प्रसंग से जोड़ती है।

करौली में कहां है यह अनोखा हनुमान मंदिर?

यह मंदिर करौली शहर से कुछ दूरी पर वीरवास गांव की पहाड़ियों के नीचे स्थित बताया जाता है। स्थानीय लोग इसे बगीची वाले हनुमान के नाम से भी जानते हैं।

मंदिर की बनावट देखने में सामान्य है, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति इसे बेहद खास बनाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर के आसपास लंबे समय तक पानी जमा रहता है। बरसात के दिनों में जलस्तर बढ़ने पर मंदिर का बड़ा हिस्सा पानी में डूब जाता है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि वे पिछले कई दशकों से मंदिर को इसी तरह पानी से घिरा हुआ देखते आ रहे हैं।

8 से 10 महीने तक पानी से घिरा रहता है मंदिर

स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर में सालभर आसानी से दर्शन करना संभव नहीं होता। बताया जाता है कि करीब 8 से 10 महीने तक मंदिर पानी से घिरा रहता है। गर्मियों में जब पानी का स्तर कम होता है, तब श्रद्धालु मंदिर तक पहुंच पाते हैं। कई बार पानी कम होने के बावजूद रास्ते में घुटनों तक पानी भरा रहता है और भक्तों को पानी के बीच से होकर मंदिर तक जाना पड़ता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार साल में केवल दो से तीन महीने ऐसे होते हैं, जब मंदिर और हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन अपेक्षाकृत आसानी से किए जा सकते हैं।

हनुमान जी के कंधों पर विराजमान हैं राम और लक्ष्मण

इस मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा है। प्रतिमा में भगवान राम और लक्ष्मण हनुमान जी के दोनों कंधों पर विराजमान दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस प्रतिमा का संबंध रामायण में वर्णित अहिरावण प्रसंग से माना जाता है।

धार्मिक कथा के अनुसार अहिरावण भगवान राम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले गया था। इसके बाद हनुमान जी उन्हें खोजते हुए पाताल लोक पहुंचे और दोनों को सुरक्षित वापस लेकर आए। इसी कथा की झलक इस विशेष प्रतिमा में दिखाई देती है, ऐसी स्थानीय मान्यता है।

बरसात में पूरा मंदिर हो जाता है जलमग्न

बारिश के मौसम में आसपास पानी बढ़ने के कारण मंदिर तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार पूरा मंदिर ही पानी के भीतर चला जाता है। इसके बावजूद मंदिर के लंबे समय तक इसी तरह खड़े रहने को लेकर स्थानीय लोगों में विशेष आस्था है। भक्त इसे हनुमान जी की कृपा और मंदिर की धार्मिक शक्ति से जोड़कर देखते हैं। हालांकि मंदिर के पानी में डूबे रहने के पीछे स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियां और जलभराव की स्थिति भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती हैं।

मंगलवार और शनिवार को पहुंचते हैं श्रद्धालु

हनुमान जी के भक्तों के लिए मंगलवार और शनिवार का विशेष महत्व माना जाता है। इन दिनों बगीची वाले हनुमान मंदिर में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। स्थानीय मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। भक्त हनुमान जी को चोला चढ़ाते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।

वीरवास गांव निवासी भरत सिंह जादौन बताते हैं कि उन्होंने बचपन से ही मंदिर को अधिकतर समय पानी में घिरा हुआ देखा है। उनके अनुसार बरसात में मंदिर पूरी तरह पानी में चला जाता है, जबकि पानी कम होने पर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं लोग

स्थानीय निवासी के अनुसार हनुमान जी की इस तरह की प्रतिमा बहुत कम देखने को मिलती है। यही वजह है कि मंदिर की अनोखी प्रतिमा और इससे जुड़ी पुरानी मान्यताएं श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। मंदिर में भगवान राम और लक्ष्मण को अपने कंधों पर धारण किए हनुमान जी का स्वरूप देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दूर से भी लोग पहुंचते हैं।

पानी के बीच मंदिर, फिर भी आस्था कायम

करौली का यह मंदिर केवल अपनी अनोखी प्रतिमा के कारण ही नहीं बल्कि साल के अधिकांश समय पानी से घिरे रहने के कारण भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। एक तरफ जहां बारिश के दौरान मंदिर तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, वहीं दूसरी ओर पानी कम होते ही श्रद्धालु दर्शन के लिए यहां पहुंचने लगते हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर लंबे समय से आस्था, परंपरा और धार्मिक विश्वास का केंद्र बना हुआ है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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