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150 साल पुराना महामाया माता मंदिर: बच्चों की सलामती के लिए चढ़ाया जाता है लकड़ी का पालना

By Tami

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धर्म संवाद / डेस्क : राजस्थान के नागौर जिले के कुचामन रोड स्थित देवली गांव में मौजूद महामाया माता मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। करीब 150 साल पुराने इस मंदिर को स्थानीय लोग ‘बच्चों वाली माता’ के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर बच्चों के शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं। यही वजह है कि मारवाड़, शेखावाटी और दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने बच्चों के साथ यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाया जाता है लकड़ी का पालना

महामाया माता मंदिर की सबसे खास परंपरा लकड़ी का पालना चढ़ाने की है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता की कृपा से जब बच्चे स्वस्थ हो जाते हैं या परिवार की मनोकामना पूरी होती है, तो आभार स्वरूप माता को लकड़ी का पालना अर्पित किया जाता है। मंदिर परिसर में रखे सैकड़ों लकड़ी के पालने वर्षों से चली आ रही इस परंपरा और लोगों की गहरी आस्था की गवाही देते हैं। पहली बार आने वाले श्रद्धालु भी इस अनोखी परंपरा को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं।

बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी है विशेष मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई बच्चा देर से बोलता है, तुतलाता है या किसी शारीरिक परेशानी से जूझ रहा होता है, तो उसके परिजन उसे महामाया माता के दरबार में लेकर आते हैं। यहां अखंड ज्योत के 21 फेरे लगाने की परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता की कृपा से बच्चों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव आता है।

सामाजिक सौहार्द की भी मिसाल है यह मंदिर

महामाया माता मंदिर केवल हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक सौहार्द का भी प्रतीक माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम परिवार भी अपने बच्चों की सलामती की दुआ मांगने और उनका जड़ला (मुंडन संस्कार) कराने आते हैं। हर साल भादवा पूर्णिमा पर लगने वाला विशाल मेला विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों को एक मंच पर लाता है। इसके अलावा हर माह शुक्ल पक्ष की दूज, सप्तमी, दशमी और चौदस को विशेष पूजा-अर्चना होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

कच्चे मंदिर से भव्य धाम तक का सफर

मंदिर के इतिहास के अनुसार, शुरुआत में यहां केवल कच्ची मिट्टी का छोटा-सा मंदिर था। समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था और सहयोग से इसका विस्तार हुआ और आज यह एक भव्य धार्मिक स्थल बन चुका है। हालांकि, वर्षों बाद भी माता के प्रति लोगों की श्रद्धा और विश्वास पहले की तरह अटूट बना हुआ है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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