ज्योतिष और हस्तरेखा विज्ञान: मूल ग्रह और हथेली के चिन्ह कैसे बताते हैं व्यक्तित्व

By Tami

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Palmistry Science

धर्म संवाद / डेस्क : ज्योतिष शास्त्र और हस्तरेखा विज्ञान में ऐसे अनेक संकेत बताए गए हैं, जिनके माध्यम से किसी भी व्यक्ति के स्वभाव, सोच और व्यक्तित्व को समझा जा सकता है। इन दोनों विद्याओं का उद्देश्य केवल भविष्य बताना ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की आंतरिक प्रवृत्तियों और जीवन की दिशा को स्पष्ट करना भी है।

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जन्मकुंडली में मूल ग्रह का महत्व

ज्योतिष में जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली का अध्ययन किया जाता है, तो सबसे पहले उसके मूल ग्रह को पहचाना जाता है। यही ग्रह व्यक्ति के व्यक्तित्व का आधार माना जाता है। मूल ग्रह की स्थिति, बल और प्रभाव के आधार पर ज्योतिषी व्यक्ति के स्वभाव, सोच और निर्णय लेने की क्षमता को समझता है।

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हर जन्मपत्री में कोई न कोई ग्रह प्रधान होता है, जिसे मूल ग्रह कहा जाता है। यही ग्रह व्यक्ति के जीवन और व्यक्तित्व पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति की धनु राशि या धनु लग्न हो और उसकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह उच्च अवस्था में स्थित हो, तो उस व्यक्ति के व्यक्तित्व में बृहस्पति से जुड़े गुण जैसे ज्ञान, धर्म, संयम, उदारता और नेतृत्व क्षमता प्रमुख रूप से देखने को मिलते हैं।

ग्रह की कमजोर स्थिति का प्रभाव

इसके विपरीत, यदि किसी जातक की कुंडली में बृहस्पति नीच अवस्था में हो, पीड़ित हो या पाप ग्रहों से प्रभावित हो, तो उसके व्यक्तित्व में बृहस्पति से संबंधित शुभ गुणों की कमी देखी जाती है। इसी प्रकार अन्य ग्रहों की स्थिति को देखकर भी व्यक्ति के स्वभाव और जीवन दृष्टिकोण का आकलन किया जाता है।

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हस्तरेखा विज्ञान और व्यक्तित्व

जैसे ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति का अध्ययन किया जाता है, वैसे ही हस्तरेखा विज्ञान में हथेली पर बने चिन्हों और पर्वतों के माध्यम से व्यक्ति के व्यक्तित्व को समझा जाता है। हस्तरेखा विशेषज्ञ हाथ की हथेली पर उस विशेष संकेत को खोजते हैं, जो व्यक्ति के जीवन और स्वभाव का आईना होता है।

यदि हथेली पर किसी ग्रह से संबंधित पर्वत पूर्ण रूप से विकसित हो, तो माना जाता है कि उस व्यक्ति में उस ग्रह से जुड़े गुण स्वाभाविक रूप से पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, बृहस्पति पर्वत का उन्नत होना व्यक्ति को ज्ञानी, नैतिक और आदर्शवादी बनाता है।

हथेली के चिन्ह क्या बताते हैं

हथेली का अध्ययन करते समय केवल रेखाएं ही नहीं, बल्कि हथेली पर बने सभी चिन्हों को ध्यान में रखा जाता है। हथेली पर अक्सर

  • सीधी और कटी हुई रेखाएं
  • बिंदु
  • क्रॉस
  • नक्षत्र
  • वर्ग
  • वृत्त
  • त्रिकोण
  • जाली जैसे चिन्ह

दिखाई देते हैं। इन सभी चिन्हों को हाथ की रेखाओं, पर्वतों और हाथ के आकार-प्रकार के साथ जोड़कर देखने पर भविष्य कथन और व्यक्तित्व का आकलन अधिक स्पष्ट होता है।

निष्कर्ष

ज्योतिष और हस्तरेखा विज्ञान, दोनों ही व्यक्ति के बाहरी और आंतरिक व्यक्तित्व को समझने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। जब ग्रहों की स्थिति और हथेली के चिन्हों का सही ढंग से अध्ययन किया जाता है, तो व्यक्ति के स्वभाव, जीवन की दिशा और संभावनाओं को बेहतर रूप में जाना जा सकता है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .