Do you want to subscribe our notifications ?

Jitiya Vrat 2026: बच्चों को दें ये 5 शुभ चीजें

By Tami

Published on:

jitiya-vrat-2026-children-5-auspicious-things

धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में जितिया व्रत, जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है, माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना से माताएं यह कठिन व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जितिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा और व्रत कथा का विशेष महत्व है।

यह भी पढ़े : Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत से पहले क्या खाएं?

इस साल जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा। व्रत और पूजा पूरी होने के बाद कई परिवारों में बच्चों को प्रसाद या शुभ वस्तुएं देने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करते समय माता-पिता संतान के मंगल और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि जितिया व्रत के बाद बच्चों को क्या देना चाहिए, तो यहां 5 ऐसी चीजों के बारे में बताया गया है, जिन्हें अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं में शुभ माना जाता है।

1. बच्चे को बांधें लाल या पीला पवित्र धागा

जितिया की कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में लाल या पीले सूती धागे का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के बाद माता भगवान जीमूतवाहन का स्मरण करते हुए बच्चे की कलाई में यह धागा बांध सकती हैं। धागा बांधते समय संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यता में इसे सुरक्षा और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, धागा बांधने की परंपरा सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा के अनुसार ही इसे करना उचित है।

2. जितिया पर बच्चों को दें नए कपड़े

त्योहार के अवसर पर बच्चों को नए वस्त्र देना भी शुभ परंपरा से जोड़ा जाता है। नए कपड़े नई शुरुआत, खुशी और उत्साह का प्रतीक माने जाते हैं। जितिया की पूजा पूरी होने के बाद बच्चे को नए कपड़े पहनाए जा सकते हैं। इसके बाद परिवार के बड़े-बुजुर्गों से बच्चे को आशीर्वाद दिलाने की परंपरा भी निभाई जा सकती है। इससे बच्चे के लिए त्योहार खास बन जाता है और परिवार में खुशी का माहौल रहता है।

3. खीरा और मौसमी फल दें

जितिया से जुड़ी कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में खीरे का भी उल्लेख मिलता है। इसे संतान और परिवार की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। पूजा के बाद खीरा और मौसमी फल प्रसाद के रूप में बच्चों को दिए जा सकते हैं। फल बच्चों के लिए पौष्टिक विकल्प भी हो सकते हैं। छोटे बच्चों को फल देते समय उनकी उम्र और खाने की क्षमता का ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से इसे संतान के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना के भाव से जोड़ा जाता है।

4. बच्चों को दें उनकी पसंद का खिलौना

जितिया का संबंध संतान के कल्याण की कामना से है, इसलिए बच्चों की खुशी भी इस पर्व का एक सुंदर हिस्सा बन सकती है। छोटे बच्चों को पूजा के बाद उनकी पसंद का खिलौना या उपयोगी उपहार दिया जा सकता है। यह कोई अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है, बल्कि बच्चे को खुश करने और उसके प्रति माता के प्रेम को व्यक्त करने का एक माध्यम हो सकता है। बच्चे को उपहार देते समय उसके स्वस्थ, खुशहाल और आनंदमय जीवन की कामना की जा सकती है।

5. ठेकुआ या चने का प्रसाद

जितिया से जुड़ी कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में ठेकुआ, चना और अन्य पारंपरिक प्रसाद का भी उल्लेख मिलता है। पूजा के बाद परिवार की परंपरा के अनुसार प्रसाद बच्चों को दिया जा सकता है। प्रसाद ग्रहण करना धार्मिक आस्था में भगवान के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है। माता बच्चे को प्रसाद देते समय उसके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना कर सकती हैं। छोटे बच्चों को प्रसाद देते समय उनकी उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

जितिया पर बच्चों को चीजें देने का क्या महत्व है?

जितिया व्रत मुख्य रूप से माताओं की संतान के प्रति प्रेम, त्याग और मंगलकामना से जुड़ा पर्व है। पूजा के बाद बच्चों को वस्त्र, प्रसाद या उपहार देना कई परिवारों में इसी भावना को व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं में इन वस्तुओं को शुभ प्रतीकों से जोड़ा जाता है, लेकिन इन्हें देना अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण भावना संतान के स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना है।

Jitiya Vrat 2026: एक नजर में

  • जितिया व्रत: 3 अक्टूबर 2026, शनिवार
  • दूसरा नाम: जीवित्पुत्रिका व्रत
  • आराध्य: भगवान जीमूतवाहन
  • मुख्य उद्देश्य: संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना
  • शुभ मानी जाने वाली चीजें: पवित्र धागा, नए वस्त्र, फल-खीरा, खिलौना और पारंपरिक प्रसाद

जरूरी बात

जितिया से जुड़ी रस्में और प्रसाद की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी भी परंपरा को अपनाने से पहले अपने परिवार की मान्यता और स्थानीय रीति-रिवाजों को प्राथमिकता दें।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

Exit mobile version