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इंदिरा एकादशी 2026 कब है? जानें पूजा विधि और नियम

By Tami

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धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। सालभर में आने वाली अलग-अलग एकादशियों का धार्मिक महत्व भी अलग-अलग बताया गया है। इन्हीं में इंदिरा एकादशी का भी विशेष स्थान है।

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पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 अक्टूबर 2026 की रात 2 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 7 अक्टूबर की रात 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा बताई गई है।

इंदिरा एकादशी पर बन रहा है सर्वार्थ सिद्धि योग

इंदिरा एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बनने की बात कही जा रही है। पंचांग के अनुसार यह योग सुबह 6:17 बजे से 10:17 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में इस दौरान भगवान विष्णु की आराधना और धार्मिक कार्य करना विशेष फलदायी माना जाता है।

इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व

इंदिरा एकादशी को भगवान विष्णु को समर्पित व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धा से व्रत रखने और श्रीहरि की पूजा करने से व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मकता, सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कई धार्मिक परंपराओं में इंदिरा एकादशी को पितरों से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पूर्वजों की शांति के लिए किए गए धार्मिक संकल्पों को भी पुण्यकारी माना जाता है।

इंदिरा एकादशी की पूजा विधि

इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

पूजा के दौरान इन बातों का ध्यान रखा जा सकता है:

  • सबसे पहले भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु का जल से अभिषेक करें।
  • श्रीहरि को पीले चंदन और पीले फूल अर्पित करें।
  • भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाएं।
  • फल और सात्विक भोग अर्पित करें।
  • इंदिरा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।
  • पूजा के अंत में अपनी भूल-चूक के लिए भगवान से क्षमा प्रार्थना करें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को भोग लगाते समय तुलसी दल अवश्य शामिल करना शुभ माना जाता है।

इंदिरा एकादशी पर क्या खाना चाहिए?

एकादशी व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार करते हैं। फल, दूध, मखाना, साबूदाना और अन्य सात्विक फलाहारी खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। हालांकि, व्रत की अलग-अलग परंपराओं में भोजन के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने परिवार की परंपरा या धार्मिक मान्यता के अनुसार ही आहार का चुनाव करना उचित है।

इंदिरा एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

एकादशी के दिन चावल का सेवन न करने की परंपरा हिंदू धार्मिक मान्यताओं में प्रचलित है। कई श्रद्धालु व्रत न रखने पर भी इस दिन चावल से परहेज करते हैं। इसे धार्मिक आस्था और व्रत की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इंदिरा एकादशी पर सात्विक भोजन और संयमित आहार को प्राथमिकता दी जाती है।

संतान सुख और समृद्धि से जुड़ी मान्यता

धार्मिक मान्यताओं में इंदिरा एकादशी के व्रत को संतान सुख की कामना से भी जोड़ा गया है। माना जाता है कि श्रद्धा और नियम के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी तरह, घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए भी इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। इन सभी बातों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए।

इंदिरा एकादशी व्रत का पारण कब करें?

एकादशी व्रत का पारण सामान्यतः द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और फिर निर्धारित पारण समय में व्रत खोला जाता है। पारण का सटीक समय स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकता है। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग में दिए गए द्वादशी पारण समय को देखना चाहिए।

इंदिरा एकादशी पर करें ये धार्मिक कार्य

इंदिरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री का दान कर सकते हैं।

दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सात्विक आचरण करना और किसी के प्रति बुरा भाव न रखना भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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