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दोपहर में पूजा करना शुभ है या अशुभ? जानें शास्त्रों के नियम और पूजा का सबसे उत्तम समय

By Tami

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Worship in the afternoon, the right time for worship

धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के लिए समय का विशेष महत्व बताया गया है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या दोपहर में पूजा करना शुभ होता है या नहीं? कई लोग सुबह पूजा करते हैं, जबकि कुछ विशेष अनुष्ठान दोपहर तक चलते रहते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि शास्त्रों के अनुसार दोपहर में पूजा का क्या महत्व है और किन परिस्थितियों में यह उचित मानी जाती है।

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क्या दोपहर में पूजा करना शुभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में दोपहर के समय नई पूजा या पूजा-पाठ का शुभारंभ नहीं किया जाता। मान्यता है कि इस समय देवी-देवता विश्राम करते हैं। यही कारण है कि कई मंदिरों में दोपहर लगभग 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक गर्भगृह के पट बंद कर दिए जाते हैं।

ऐसी मान्यता है कि इस समय भगवान के विश्राम में बाधा नहीं डालनी चाहिए। इसलिए नियमित पूजा की शुरुआत सुबह या शाम के समय करना अधिक शुभ माना जाता है।

यदि पूजा सुबह शुरू होकर दोपहर तक चले तो क्या दोष लगता है?

यदि कोई यज्ञ, हवन, कथा, विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक अनुष्ठान सुबह प्रारंभ हुआ हो और वह दोपहर या शाम तक चलता रहे, तो इसमें किसी प्रकार का दोष नहीं माना जाता। धार्मिक नियम केवल दोपहर में नई पूजा शुरू करने को लेकर लागू होते हैं, पहले से चल रहे अनुष्ठानों पर नहीं।

किन परिस्थितियों में दोपहर में पूजा करना उचित माना जाता है?

कुछ धार्मिक अवसरों पर पूजा का शुभ मुहूर्त ही दोपहर में होता है। ऐसी स्थिति में दोपहर में पूजा करना पूरी तरह स्वीकार्य माना जाता है।

इनमें प्रमुख उदाहरण हैं—

  • अभिजीत मुहूर्त में होने वाली पूजा।
  • नवरात्रि के कलश स्थापना का दोपहर का शुभ मुहूर्त।
  • कालसर्प दोष निवारण जैसे विशेष अनुष्ठान, जिनका समय राहुकाल में निर्धारित होता है।
  • ज्योतिषीय कारणों से निर्धारित विशेष पूजन।

ऐसी परिस्थितियों में दोपहर में पूजा करना शास्त्र सम्मत माना जाता है।

क्या दोपहर में भगवान का नाम जप सकते हैं?

यदि दोपहर में नियमित पूजा करना संभव न हो, तो भगवान का मानसिक स्मरण, मंत्र जाप या ध्यान किया जा सकता है। इस दौरान श्रद्धा से अपने इष्टदेव का नाम लेना, मन ही मन प्रार्थना करना या दूर से मंदिर को प्रणाम करना भी शुभ माना जाता है।

पूजा करने का सबसे शुभ समय कौन सा है?

शास्त्रों में दिन के कुछ विशेष समय पूजा के लिए अत्यंत फलदायी बताए गए हैं।

1. ब्रह्म मुहूर्त

पूजा, जप, तप और ध्यान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

  • सामान्यतः सूर्योदय से लगभग 1.5 से 2 घंटे पहले।
  • लगभग सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे के बीच का समय।
  • इस समय वातावरण शांत, पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।

इस समय की गई पूजा से आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।

2. प्रातःकाल

सूर्योदय से लेकर लगभग सुबह 8 बजे तक का समय भी नियमित पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

इस समय की गई पूजा से—

  • आरोग्य
  • बुद्धि
  • यश
  • सुख-समृद्धि
  • परिवार में सकारात्मक ऊर्जा

की प्राप्ति होने की मान्यता है।

3. प्रदोष काल

सूर्यास्त के बाद प्रारंभ होने वाला प्रदोष काल भगवान शिव और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस समय दीपक जलाकर आरती करने और भगवान का स्मरण करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।

4. निशिता मुहूर्त

कुछ विशेष तांत्रिक और वैदिक साधनाओं के लिए मध्यरात्रि का निशिता मुहूर्त भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय विशेष मंत्र सिद्धि और साधना की जाती है।

निष्कर्ष

सामान्य धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दोपहर में नई पूजा शुरू करना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इस समय देवी-देवताओं के विश्राम का समय माना जाता है। हालांकि यदि कोई पूजा सुबह से चल रही हो या किसी विशेष व्रत, अभिजीत मुहूर्त अथवा ज्योतिषीय कारणों से दोपहर में पूजा का विधान हो, तो उसे करना पूरी तरह स्वीकार्य है।

यदि दोपहर में पूजा संभव न हो, तो भगवान का मानसिक स्मरण, नाम जप और ध्यान करना भी पुण्यदायी माना गया है। नियमित पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त, प्रातःकाल और प्रदोष काल सबसे श्रेष्ठ समय माने गए हैं।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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