भाई-बहन में बार-बार होता है झगड़ा? कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति हो सकती है वजह

By Tami

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Brother Sister Relationship Astrology

धर्म संवाद / डेस्क : भाई-बहन का रिश्ता जीवन के सबसे खास और भावनात्मक रिश्तों में से एक माना जाता है। बचपन की शरारतों से लेकर मुश्किल समय में एक-दूसरे का सहारा बनने तक, यह संबंध विश्वास और अपनत्व की मजबूत डोर से बंधा होता है। लेकिन कई बार देखा जाता है कि भाई-बहनों के बीच छोटी-छोटी बातों पर विवाद, मनमुटाव और दूरी बढ़ने लगती है।

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार, भाई-बहनों के संबंधों को समझने के लिए जन्म कुंडली के कुछ विशेष भावों और ग्रहों का अध्ययन किया जाता है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार कुछ ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति रिश्तों में तनाव और गलतफहमियां पैदा कर सकती है।

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भाई-बहनों के संबंध में कौन से भाव महत्वपूर्ण होते हैं?

ज्योतिष शास्त्र में तृतीय भाव (तीसरा भाव) छोटे भाई-बहनों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि ग्यारहवां भाव बड़े भाई-बहनों से जुड़ा माना जाता है। इन भावों में स्थित ग्रह, उनके स्वामी ग्रह और उन पर पड़ने वाली शुभ-अशुभ दृष्टियां भाई-बहनों के रिश्ते की मजबूती या कमजोरी को प्रभावित कर सकती हैं।

1. मंगल का अशुभ प्रभाव बढ़ा सकता है टकराव

मंगल को ऊर्जा, साहस और प्रतिस्पर्धा का ग्रह माना जाता है। यदि मंगल तृतीय भाव में अशुभ स्थिति में हो या इस भाव को प्रभावित कर रहा हो, तो भाई-बहनों के बीच गुस्सा, अहंकार और प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में छोटी-छोटी बातों पर भी विवाद होने की संभावना रहती है।

2. राहु पैदा कर सकता है गलतफहमियां

राहु को भ्रम, संशय और अस्थिरता का ग्रह माना जाता है। जब राहु भाई-बहनों से जुड़े भावों या उनके स्वामी ग्रह को प्रभावित करता है, तो रिश्तों में अविश्वास और गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। कई बार बिना किसी स्पष्ट कारण के भी भाई-बहनों के बीच तनाव बना रह सकता है।

3. केतु से बढ़ सकती है भावनात्मक दूरी

केतु आध्यात्मिकता और वैराग्य का कारक ग्रह माना जाता है। इसका प्रभाव भाई-बहनों के बीच भावनात्मक दूरी और संवाद की कमी ला सकता है। ऐसे लोगों के बीच प्रेम तो होता है, लेकिन वे अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते, जिससे रिश्तों में दूरी महसूस होने लगती है।

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4. शनि ला सकता है लंबे समय तक मनमुटाव

शनि कर्म और अनुशासन का ग्रह है, लेकिन इसकी कठोर प्रकृति कई बार रिश्तों में ठंडापन भी ला सकती है। यदि शनि तृतीय या ग्यारहवें भाव को प्रभावित करे, तो भाई-बहनों के बीच लंबे समय तक संवादहीनता, दूरी या मनमुटाव की स्थिति बनी रह सकती है।

5. कमजोर बुध से बढ़ सकती है बातचीत की समस्या

बुध को संचार, बुद्धिमत्ता और समझ का ग्रह माना जाता है। यदि बुध कमजोर हो या पाप ग्रहों से प्रभावित हो, तो बातचीत में गलतफहमियां और कटुता बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में भाई-बहनों के बीच संवाद की कमी रिश्तों को कमजोर कर सकती है।

कुंडली की कौन-सी स्थितियां बढ़ा सकती हैं तनाव?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निम्न स्थितियां भाई-बहनों के बीच विवाद का कारण बन सकती हैं—

  • तृतीय भाव में राहु, केतु, शनि या अशुभ मंगल की उपस्थिति।
  • तृतीय भाव के स्वामी ग्रह का छठे, आठवें या बारहवें भाव में होना।
  • तृतीय और ग्यारहवें भाव पर पाप ग्रहों की दृष्टि।
  • मंगल और शनि का तनावपूर्ण योग।
  • भाई-बहनों से जुड़े भावों का कमजोर होना।
  • बुध का अशुभ ग्रहों से प्रभावित होना।

रिश्तों को मजबूत करने के लिए क्या करें?

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ग्रहों का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन रिश्तों को मजबूत बनाने में संवाद, सम्मान और समझदारी की भूमिका सबसे अधिक होती है।

  • भाई-बहनों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें।
  • छोटी बातों को बड़ा न बनने दें।
  • गुस्से में प्रतिक्रिया देने से बचें।
  • एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें।
  • परिवार में सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .