धर्म संवाद / डेस्क : जगन्नाथ रथ यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों में से एक अडापा बिजे श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन को उनके रथों से पारंपरिक पहांडी (पहंडी) यात्रा के माध्यम से गुंडिचा मंदिर स्थित अडापा मंडप तक ले जाया गया। अब महाप्रभु अगले 9 दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
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क्या है अडापा बिजे का धार्मिक महत्व?
जगन्नाथ संस्कृति में अडापा बिजे रथ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ का जन्मस्थान या मौसी का घर माना जाता है। रथ यात्रा के दौरान महाप्रभु अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ यहां नौ दिनों तक विश्राम करते हैं।
इसके बाद बहुड़ा यात्रा के माध्यम से भगवान पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं। इस दौरान लाखों श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर पहुंचकर महाप्रभु के दर्शन का पुण्य प्राप्त करते हैं।
पहांडी परंपरा के साथ अडापा मंडप तक पहुंचे महाप्रभु
जगन्नाथ मंदिर के सेवायतों के अनुसार, अडापा बिजे से पहले रथों से घोड़ों को हटाया जाता है। इसके बाद नारियल के पेड़ों से तैयार विशेष चारमाल लगाए जाते हैं, जिनकी सहायता से भगवान को पारंपरिक पहांडी शैली में अडापा मंडप तक ले जाया जाता है। मंदिर पहुंचने के बाद भगवान को विधिवत रत्न सिंहासन पर विराजमान कराया जाता है, जहां वे नौ दिनों तक भक्तों को दर्शन देते हैं।
अडापा बिजे अनुष्ठान की पूरी प्रक्रिया
इस पवित्र अनुष्ठान में अनेक सेवायत अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। दैतापति सेवायत भगवान को सहारा देकर आगे बढ़ाते हैं, जबकि प्रतिहारी सेवायत पूरे मार्ग का संचालन करते हैं।
अनुष्ठान से पहले भगवान की सभी पारंपरिक नीतियां संपन्न की जाती हैं, जिनमें शामिल हैं—
- मंगला आरती
- अवकाश नीति
- गोपाल वल्लभ भोग
- सकाल धूप
- चंदन लागी
- महास्नान
- मध्याह्न धूप
- संध्या आरती
इन सभी धार्मिक अनुष्ठानों के बाद पुष्पांजलि अर्पित की जाती है और फिर भगवान की पहांडी यात्रा शुरू होती है।
गुंडिचा मंदिर में 9 दिनों तक करेंगे भक्तों को दर्शन
अडापा मंडप में विराजमान होने के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अगले नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में ही रहेंगे। इस दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु महाप्रभु के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इसके बाद निर्धारित तिथि पर बहुड़ा यात्रा के माध्यम से भगवान पुनः श्रीजगन्नाथ मंदिर लौटेंगे।
सुरक्षा के रहे व्यापक इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए। पूरे क्षेत्र में पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), अग्निशमन विभाग और चिकित्सा टीमों की तैनाती की गई। भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष कॉर्डन व्यवस्था लागू की गई ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से भगवान के दर्शन कर सकें। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए पूरे आयोजन पर लगातार निगरानी रखी।
अडापा बिजे क्यों है इतना खास?
- रथ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक चरण माना जाता है।
- भगवान जगन्नाथ अपने जन्मस्थान/मौसी घर माने जाने वाले गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं।
- महाप्रभु नौ दिनों तक यहीं विराजमान रहते हैं।
- पहांडी परंपरा और सेवायतों की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का भव्य दर्शन होता है।
- लाखों श्रद्धालुओं को गुंडिचा मंदिर में भगवान के दर्शन का अवसर मिलता है।
