धर्म संवाद / डेस्क : मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि भस्म आरती के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों भक्त उज्जैन आते हैं। महाकाल मंदिर में पूरे दिन छह बार आरती होती है, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली भस्म आरती को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
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क्या है महाकाल की भस्म आरती?
महाकाल मंदिर में तड़के ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित होने वाली भस्म आरती एक अनूठी धार्मिक परंपरा है। इस दौरान भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन्हें घटाटोप स्वरूप में सजाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह आरती शिव के वैराग्य और मृत्यु पर विजय के प्रतीक स्वरूप मानी जाती है। भस्म आरती को “मंगला आरती” भी कहा जाता है। इस दिव्य आरती के दर्शन को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और श्रद्धालु इसे जीवन का दुर्लभ आध्यात्मिक अनुभव मानते हैं।
महाकाल दर्शन के बाद क्यों किए जाते हैं जूना महाकाल के दर्शन?
उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि श्री महाकालेश्वर के दर्शन के बाद जूना महाकाल के दर्शन करना भी शुभ माना जाता है। इससे दर्शन यात्रा पूर्ण मानी जाती है और भक्तों को विशेष आध्यात्मिक संतोष प्राप्त होता है।
उज्जैन को क्यों कहा जाता है धर्म नगरी?
उज्जैन का इतिहास और धार्मिक महत्व हजारों वर्षों पुराना है। पुराणों में इस नगरी का उल्लेख अवंतिका, अवंतिकापुरी, उज्जैनी और कनकश्रृंगा जैसे कई नामों से मिलता है। यह नगरी प्राचीन काल से ही आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ज्योतिषीय केंद्र रही है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की क्या है विशेषता?
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुनिया में बाबा महाकाल ही ऐसे ज्योतिर्लिंग हैं जिन्हें दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा जाता है। तांत्रिक परंपराओं में दक्षिणमुखी शिवलिंग का विशेष महत्व बताया गया है।
महाकाल की पूजा से दूर होते हैं ग्रह दोष
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा महाकाल की आराधना से कालदोष, शनि दोष, राहु-केतु दोष और अन्य ग्रह बाधाओं में राहत मिलती है। कहा जाता है कि महाकाल की कृपा से जीवन की नकारात्मक ऊर्जाएं कम होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
भक्तों का विश्वास है कि महाकाल की पूजा-अर्चना व्यक्ति को भय, संकट और नकारात्मक प्रभावों से मुक्त करने में सहायक होती है। इसी कारण हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दरबार में शीश नवाने पहुंचते हैं।






