धर्म संवाद / डेस्क : उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित श्री साई शिव गंगा धाम में दुनिया के सबसे बड़े 5211 किलोग्राम वजनी पारद शिवलिंग की स्थापना की गई है। आध्यात्मिक जगत में इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह विशाल पारद शिवलिंग हरिद्वार-दिल्ली नेशनल हाईवे पर बहादराबाद टोल प्लाजा के समीप स्थित शिरडी साईं बाबा मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है।
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10 वर्षों की साधना और अनुसंधान का परिणाम
इस अद्भुत पारद शिवलिंग का निर्माण पुणे निवासी हीलिंग गुरु रघुनाथगुरुजी (रघुनाथ येमूल गुरुजी) के मार्गदर्शन में लगभग 10 वर्षों में पूरा किया गया। शिवलिंग के निर्माण में पारा (Mercury), चांदी, स्वर्ण (Gold) तथा 108 प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियों के अर्क का उपयोग किया गया है।

रघुनाथगुरुजी के अनुसार, यह शिवलिंग केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि ध्यान, आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है। उन्होंने बताया कि वर्षों की साधना और शोध के बाद तैयार किया गया यह पारद ध्यान लिंगम मानव कल्याण और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देता है।
इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज नाम
अपने विशाल आकार और 5211 किलोग्राम वजन के कारण इस पारद शिवलिंग को इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया है। आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह अपने प्रकार का विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग है।
तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन
शिवलिंग की स्थापना के अवसर पर तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, पूजन और विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। देशभर से संत-महात्मा, श्रद्धालु और गणमान्य लोग इस आयोजन में शामिल हुए।
कई प्रमुख संत और हस्तियां रहीं मौजूद
पंचायती निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि रघुनाथ देव महाराज द्वारा भेंट किया गया यह पारद शिवलिंग केवल हरिद्वार ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, दीदी मां साध्वी ऋतंभरा, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा समेत कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।
आयोजन को सफल बनाने में राजीव बंसल की रही अहम भूमिका
इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में उद्योगपति एवं समाजसेवी राजीव बंसल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन की व्यवस्थाओं और समन्वय में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। गौरतलब है कि रघुनाथगुरुजी इससे पहले वर्ष 2019 में लगभग 10 हजार लोगों की सहभागिता के साथ एक विशाल अश्वमेध यज्ञ का भी सफल आयोजन कर चुके हैं।






