धर्म संवाद / डेस्क : Chaiti Chhath Puja लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 22 मार्च से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है। यह चार दिनों तक चलने वाला पवित्र पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना को समर्पित होता है, जिसे खासकर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
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Chaiti Chhath Puja 2026: नहाय-खाय से शुरू होता है महापर्व
छठ पूजा का पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है।
- इस दिन व्रती पवित्र स्नान करते हैं
- घर और रसोई की सफाई की जाती है
- सात्विक भोजन बनाकर व्रत का संकल्प लिया जाता है
यह दिन शुद्धता, संयम और मानसिक पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
कद्दू-भात प्रसाद का महत्व
नहाय-खाय के दिन खास तौर पर कद्दू-भात (कद्दू, चना दाल और चावल) बनाया जाता है।
- इसे पूरी तरह सात्विक तरीके से तैयार किया जाता है
- इसमें लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं होता
- पहले भगवान को भोग लगाया जाता है, फिर व्रती ग्रहण करते हैं
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह भोजन शरीर और मन को शुद्ध करता है और व्रत के लिए तैयार करता है।

चार दिनों तक चलता है छठ पर्व
चैती छठ चार दिनों का कठिन और नियमबद्ध व्रत है:
- नहाय-खाय (पहला दिन)
- खरना (दूसरा दिन)
- संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन)
- उषा अर्घ्य (चौथा दिन)
खरना के बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं और सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।
आस्था और प्रकृति का पर्व
छठ पूजा को प्रकृति और सूर्य उपासना का प्रतीक माना जाता है।
इस दौरान श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं।
चैती छठ का पहला दिन नहाय-खाय शुद्धता और अनुशासन का प्रतीक है। कद्दू-भात का प्रसाद इस पर्व की खास पहचान है, जो व्रती को आगे के कठिन व्रत के लिए तैयार करता है।







